Friday, April 15, 2022

डॉ बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर

       डॉ बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर का जन्मदिन है 

14 अप्रैल 1891 में मध्यप्रदेश में महू नाम के गांव में उनका जन्म हुआ था ।उनके पिता जी का नाम रामजी सकपाल था और माता कानाम सविता भाई था 

      डॉ बाबासाहेब आंबेडकर यानी कि महामानव ,भारतरत्न ,बोधिसत्वशिक्षाविद ,अर्थशास्त्री ,राष्ट्र की एकात्माता के लिए इस समाजमें दलित पिछड़े हुए संपूर्ण समाज को ऊपर लाने के लिए अपना जीवन संपूर्ण खर्च करने वाले और भारत की एकात्मता के खातिरअखंडित भारत बनाए रखनेक्वलिए अन्य धर्म  अपनाकर भारतीय मूल के बौद्ध धर्म को अंगीकार करने वाले महामानव बाबासाहेबआंबेडकर है।

        डॉ बाबासाहेब क्या नहीं थे ?वह अच्छे लेखक थे ।शिक्षा शास्त्री थे ।अर्थशास्त्री थे ।पत्रकार थे ।वक्ता थे ।राजनीतिक थे ।कानूनविद थे ।और समाज सुधारक पत्रकार के नाते उन्होंने मुक नायक ,बहिष्कृत भारत और समता नाम का मैगज़ीन शुरू किया हुआ था,क्षमता का आगे जाकर नाम जनता और बाद में प्रबुद्ध भारत रहा।

        आज से कई साल पहले एक मंदिर में बाहर स्नान करके  रहे स्वामी जी के सामने एक बुड्ढी महिला जब सफाई कर रही थी तबमहाराज ने कहा आप दूर हो जाइए क्योंकि मैं अपवित्र हो रहा हूं तब वह महिला ने पूछा था आप बताइए कौन सी जगह जहां कोई नहीं है।और मैं वहां सफाई करूंगी तो अपवित्र नहीं होगा।स्वामी जी को लगा यह बड़ा तत्वज्ञान है ।आत्मालत सर्वभूतेषु ।स्वामी जी ने उनकीशिक्षा मानकर अपना मन को पवित्र कर दिया ।बाद में हर दिन जब नदी में स्नान करने जाते थे तब दो अपने शिष्य जो सवर्ण थे उनकेकंधे पर हाथ रखकर जाते  थे लेकिन नदी में स्नान करके वापस आने के समय दो दलित शिष्यों के कंधे पर हाथ रखकर चलते थे ।वहनदी का पानी तो शरीर को स्वच्छ कर सकता है लेकिन मन को स्वच्छ समरसता ही कर सकती है।

         आज उनके 131 वे जन्मदिन पर हम डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर को याद करेंगे ।उनका सिर्फ नाम स्मरण करना नहीं है ,उनकीवाहवाही करना सिर्फ नहीं है ,लेकिन उनके जीवन में रहे गुण और कार्य से प्रेरणा लेकर उनकी पगदंडी पर चलने का प्रामाणिक प्रयत्नकरना है ।जैसे कहा जाता है कि ईश्वर के और वेद के बारे में हरि अनंत हरि कथा अनंता ।लेकिन ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या ।डॉ बाबासाहेबके जीवन के बारे में बहुत कुछ बता सकते हैं लेकिन इतना बताएं कि भारत की अखंडता के लिए ,समरसता के लिए अपना जीवनन्योछावर करने वाले डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर थे 

       उन्होंने जो काम किया जो अमेरिका में श्वेत और अश्वेत के बीच में रहे तफावत -भेदभाव को दूर करने वाले मार्टिन लूथर किंग नेकिया थानेशनल मंडेला ने दक्षिण अफ्रीका में लिए अश्वेत लोगों के लिए किया ,जैसा गुलामी दूर करने के लिए अब्राहम लिंकनअमेरिका में किया ,ऐसा काम डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर ने भारत में किया है।

     आज डॉ बाबासाहेब को विदा। लिए हुए काफी वर्ष बीत गए लेकिन उनके जीवन के कार्य की प्रेरणा अभी तक चालू है ।समाज केअंधकार को दूर कर रहा है और राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिए चरित्र की महत्ता बताता है ।व्यक्तिगत और राष्ट्रीय चरित्र के बिना यह देशप्रगति नहीं कर सकता ।एक अखंड देश के लिए आदर्श देने वाले थे डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर ।वह कहते थे मनुष्य निर्माण के लिएसंस्कार परिवर्तन चाहिए और सामाजिक समता दोनों महत्व की चीज है

       डॉ बाबासाहेब आंबेडकर ने आचार्य अत्रे द्वारा निर्मित चलचित्र "महात्मा फुले "का उद्घाटन फरवरी 1954 में किया था उन्होंने कहाथा "नैतिकता और चरित्र के बिना देश का कोई भविष्य नहीं है ।सरकार और कायदे कानून से सब कुछ नहीं हो सकता है ।सबके बीच मेंधर्म ही रहना चाहिए ।ऐसे धर्म सुधारक थे ज्योतिबा फुले ।जब धर्म पवित्र होता है तब सद्गुण आता है ।तब समझना चाहिए कि हमारे मेंधार्मिक ताई है। 

      आज जब देश में प्रांतवादभाषावाद ,भेदभाव ,अलगता ,अस्पृश्यता ,जाति भेद ,धर्म संप्रदाय स्वार्थ और संघर्ष के बातें दिख रही है ।स्वार्थी प्रवृतियां बढ़ रही है ।राष्ट्र की एक एकात्मताके लिए कई कई प्रश्न खड़े हुए हैं ।तब यह देश को सिर्फ कायदे कानून ,सरकारकुछ नहीं कर सकती ।इसके लिए चाहिए महापुरुषों ने बताया वह करे।

        हमारे देश की एक कम नसीबी है कि हमने भगवान ,अवतार ,महापुरुष ,हर नेता तो को बांट दिया है ।जैसे बंगाल के लोग कहेंगेरवीन्द्रनाथ टैगोर हमारे हैं ,महाराष्ट्र के लोग कहेंगे लोकमान्य तिलक हमारे हैं ,गुजरात के लोग कहेंगे महात्मा गांधी और सरदार पटेलहमारे ,संत ज्ञानेश्वर कौन ब्राह्मण के ,संत तुकाराम को बनिया के ,भक्त नामदेव को दर्जी के ,गोरा कुंभार कुम्हार ज्ञातियोंके,संत रविदासकिसका ?महार जाति का ।ऐसे ही हमने डॉ बाबासाहेब आंबेडकर को एक दलितों का उद्धारक कहकर एक संकुचित कर दिया है ।वहफक्त पिछड़े हुए दलितों के नेता नहीं थे ।वो राष्ट्रीयता के विषय को पूजने वाले थे ।अनेक संघर्षों के बाद यह राष्ट्रीय एकात्मता औरअखंडता के लिए अपना जीवन न्योछावर करने वाले थे ।इसलिए हमें पूरे राष्ट्र के नेता के रुपमे याद करना चाहिए। वो कह रहे थे किजातीयता के वडवानल ने भगवान तथागत बुद्ध ,विवेकानंदनामदेव ,तुकाराम कीसीको भी नहीं छोड़ा है ।उनको कि जातीयता केवडवानल में खाक कर दिया है।

      दत्तोपंत ठेंगड़ी बताते हुए "बाबा साहब के समर्थक और उनके विचार के विरुद्ध के बीच में कितनी बड़ी खाई हो गई है कि लोगसंकुचित स्वार्थ के लिए उन्हें कुछ छोटे कोने में डाल रहे हैं ।वह उनके  विचार कार्य और प्रेरणा के समझ नहीं रहे , यह समझना चाहिए ।उनको हम रामास्वामी नायकर और लालडेंगा जैसे अलगता वादी नेताओं के साथ कभी नहीं बिठा सकते। 

      1950 में अपने सम्मान का प्रत्युत्तर करते हुए डॉक्टर बाबा साहब ने कहा था कि "अब हमने देश के स्वतंत्रता पाई है ,लेकिन हमेंध्यान रखना चाहिए हम फिर गुलाम  बन जाए ।अब हमारे हाथ में सता है  सोच बदलनी चाहिए ।अब बात सिर्फ करेंगे ऐसा नहींचलेगा ।वह तो करते रहेंगे लेकिन देश की स्वतंत्रता की रक्षा करनी है ।हमारा देश कई बार स्वतंत्र होकर फिर पराधीन हो गया है ।हममुसलमान और अंग्रेजों के गुलाम रहे हैं ।स्वतंत्रता की सभी को जरूरत है ।यदि फिर गुलामीके दिन हो जाएंगेतो वह हमारा दुर्भाग्य होगा।

       जब स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव चल रहा है हम स्वतंत्र हो गए ,कायदे कानून बनाए ,आरक्षण की व्यवस्था भी हुई है ।फिर भीबाबा साहब के सपनों का भारत हम अभी तक नहीं ला सके ।अभी भी समाज में कई जगह ग्रामीण इलाका में अशिक्षित और स्वार्थीलोगों के बीच हमें भेदभाव की नीति देखने को मिलती है ।कई स्थानों में मंदिरों में सब को प्रवेश नहीं है ।मंदिर में प्रवेश ,पानी का एकसमान स्तोत्र और सभी के लिए एक श्मशान होना ।यह आवश्यक बात है ।अब तो यह सब बात शासन और कानून से नहीं हो सकता है ।हमें हमारे मन में रहे भेदभाव को दूर करना पड़ेगा ।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परम पूज्य गुरु जी कहते थे अश्पृश्यता हमारे मनका कारोग है ।वसंत व्याख्यानमाला में संघ के तृतीय सरसंघचालक बाला साहब ने कहा था अगर "अस्पृश्यता पाप नही है तो और कुछ पापनहीं है।

         यह सब परिस्थितियों का उपाय डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर ने कहा था ।उन्होंने कहाःदलितों को जागृत होना चाहिए ,शिक्षितबनाना चाहिए ,संगठित होना चाहिए अपने पैर पर खड़ा होना चाहिए और संघर्ष के लिए क्षमता अर्जित करनी चाहिए।"

     समाज में रहे यह सब भेदभाव को दूर करने के लिए संपूर्ण समाज को एक करना है  समता सब देश के लिए बताया जाता है लेकिनसमता  यह बाहर का दिखाओ ही एक ।ऐसा दिखता है ।लेकिन जो समरसता शब्दों का उपयोग करते हैं तो हुदयका भाव दिखाता है ।डॉक्टर बाबा साहेब आंबेडकर ने भी कहा था कि समता स्वतंत्रता और बंधुता हो जाती है।संविधान में यह चीजें मैंने फ्रेंच क्रांति में  से नहींलेकिन लिए भगवान तथागत बौद्ध के संदेश मिली है। 

      सामाजिक समरसता के लिए क्या करना चाहिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय कहते थे जब एक व्यक्ति खड्डे में गिरा है तो उनकोबाहर निकालने के लिए वह खड्डे में पड़े व्यक्ति को अपने पैरों पर थोड़ा ऊंचा उठना चाहिए और बाहरी व्यक्ति ने अपना हाथ देखकर उनको बाहर निकालना चाहिए ।आज समाज की स्थिति ऐसी है पिछड़े हुए लोगों को अपने पैर पर थोड़ा खड़ा  होना चाहिए और विकसितलोगों ने उनका हाथ पकड़ बाहर निकालना चाहिए। 

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      1935 में जो वर्धा में लगे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ शिविर में महात्मा गांधी जी आए और डॉक्टर हेडगेवार को पूछा कि यहां कोईपिछड़ीजातिके है क्या बार-बार एक प्रश्न करने के बाद उन्होंने देखने को मिला कि भोजन पीटने वाले में कहीं लोग तथाकथित पिछड़ीजाति के थे तब गांधी जी के शब्द निकल गए मैं जो कुछ करना चाहता हूं वह आप कर रहे हैं।

      राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परम पूजनीय गुरु जी भी संघ शिक्षा वर्ग में एक दलित स्वयंसेवक जब जलेबी पीरसोनेमें हिचकिचाहटकर रहे थे ,तब उन्होंने अपने पास बुला कर उनके हाथ से अपनी थाली में जलेबी ली थी।

डॉक्टर बाबा साहब और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कई प्रसंग एक दूसरे के जानने के लिए मिले हैं।

        हमारा हिंदू धर्म कहता है "आत्मावतसर्वभूतेषु " उडीपीमें हो गए विश्व हिंदू परिषद के सम्मेलनों में सब संतो ने एक साथ कहा था 

"हिंदवा सोदरा सर्वे 

ना हिंदू पतितो भव

हिंदू रक्षा मम दीक्षा

मम मंत्र  समानता"

       "सर्वे सुखिनः संतु सर्वे संतु निरामया "

आत्मीयता करुणा प्रेम हमारा धर्म के आचरण का आधार है

      1924 में जुलाई के 30 तारीख को बहिष्कृत हितकारिणी सभा डॉक्टर बाबा साहब ने बनाई थी ।वह कहते थे बिछड़े हुए बंधुओं कोआगे लाने के लिए सभी वर्गों को साथ में आना चाहिए ।इसलिए उन्होंने बनाई इस सभा में अध्यक्ष के रूप में चिमनलाल सेतलवार,उपाध्यक्ष में जी के नरीमन ,दी.पाचौहान डॉक्टर परांजपे और .खेर को लिया था ।वह खुद उपाध्यक्ष रहे थे ।उन्होंने अपने भाषण मेंकई बार बताया था अपनी ताकत सब राजनीति में लगाने की जरूरत नहीं है ।बहिष्कृत लोगों के हित के लिए सब लोगों को साथ मेंआकर काम करना चाहिए ।समाज का छठा भाग वह है। सबको साथ मिलकर काम करना चाहिए

जैसे अमेरिकन क्रांति में दो व्यक्ति हो गई ब्यूरो राष्ट्रीय और मार्टिन लूथर किंग ।बेड राष्ट्रीय जातिवाद और संघर्ष की बात कहते थे तोमार्टिन लूथर किंग सबको साथ लेकर एकता रखने के लिए कहते थे ।तो डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडक अब्राहम लिंकन और नेल्सन मंडेलाकी तरह विश्व मानव की तरह भारत में तथाकथित पिछड़े और दलित वर्ग को आगे लाने के लिए पूरा जीवन बिता दिया ।राष्ट्रीयस्वयंसेवक संघ के किशोर भाई मकवाना के पुस्तक की प्रस्तावना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है की जैसे मार्टिन लूथर किंगविश्वमानव है ऐसा ही काम डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर ने किया है ।लेकिन हमने उनका नाम एक छोटे से कोने में रख दीया है 

   १९५४ सोलापुर में 14 जनवरी के दिन वह डॉक्टर बीवी मोदी को मिले हैं और उन्होंने कहा था आप के कारण ही में विशाल सार्वजनिककाम में आगे रहा हूं ।ऐसा स्वर्ण लोगों के साथ भी बाबा साहब के बहुत अच्छे संबंध थे

।चवदार तालाब के सत्याग्रह के समय ब्राहमीनोने बताया कि आपके सत्याग्रह में से ब्राह्मण विरोधी शब्द निकाल दो तो हम आपकोमदद करेंगे ,तब बाबा साहब का जवाब था मेरा संघर्ष ब्राह्मण जाति के सामने नहीं है ,मेरा संघर्ष रीति रिवाज और परंपरा के सामने हैं ।दूसरे को हिन समझने की रुढीके सामने है मैं  

     अध्यापक ठाकरे को उन्होंने मिलन विद्यालय में रखा था तब जब अध्यापक ने पूछा आप ब्राह्मण के विरुद्ध क्यों बोलते हो ? और कामकरते हो ?तो उन्होंने कहा था मैं किसी जाति के सामने नहीं उनकी वृत्ति के सामने लड़ता हु। ऐसा होता तो आप ब्राह्मण को मैंने अपनेविद्यालय में नहीं रखा होता। 

        1936 में हिंदू धर्म के पालने वाले समाज के लोगों ने किया हुआ दुर्व्यवहार के कारण डॉक्टर बाबा साहब ने तय किया था कि मेराजन्म हिंदू धर्म में हुआ है लेकिन मृत्यु के पहले  यह धर्म में नहीं रहूंगा 1956 में उनकी मृत्यु हुई ।उनके पहले उन्होंने बौध्ध धर्म अंगीकारकर लिया था ।इस समय कहीं इस्लाम के मौलवी और ईसाई के पादरी उनके पास आए थे ।काफी कुछ उन्हें लालच बताई गई थी ।लेकिन फिर भी वह ईसाई और मुस्लिम में  बनते हुए उन्होंने कहा कि बौध्ध भारतीय मूल का धर्म है ।और राष्ट्र के विरोध में नही है औरकरुणा का प्रेम का है ।मैं ऐसे धर्म को अपना कर इस राष्ट्र के मूल में रहुगा।

      महात्मा गांधी जी के साथ हम उन्होने वचन दिया था मैं कुछ देश के विरुद्ध और देश की अखंडता का भेद करनेका कभी कुछ नहींकरूंगा ।और वह अपने जीवन में सार्थक कीया 

       गोलमेजी परिषद के बाद जब अंग्रेजी सरकार ने अलग दलितोके लिए निर्वाचन पृथक क्षेत्र की जाहिरात की तब महात्मा गांधी जी नेकहा में दलितों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र का हिमायती नहीं हूं ।उन्होंने आमरण उपवास जाहिर किया ।डॉ बाबासाहेब आंबेडकर उनकेविरुद्ध विचार के थे ।कई दिनों बातें  चले बाद में मदन मोहन मालवीय ने मध्यस्था की और बाबा साहब और गांधीजी दोनों मान गए ।यहपूना पैक्ट हुआ और दलितों को अलग निर्वाचन क्षेत्र  देते हुए कांग्रेस ने अपने चुनाव क्षेत्र में काफी दलित लोगों को रखा।

       1947 में संविधान सभा में उन्होंने कहा था कि अब हमें भेद अलगता और जातिवाद सब को भूल ना जाना चाहिए और राष्ट्र के रूपमें एकत्र होना चाहिए 1948 में 25 नवंबर ने कहा था अब सब भारतीय है भाई बहन है। वह बोलते थे मेरा स्वभाव उग्र है ।मेरी विदेशयात्रा में लेकिन कभी भी मैने भारत की प्रतिष्ठा को आंच आने नहीं दी है ।प्रथम गोलमेजी परिषद में गए थे तब कई लोगों ने उन्हें दलीलप्रोटेस्टेंट हिंदू या नोन कम्युनिस्ट कहा ।वह बोलते मुझे ब्रिटिश एजेंट ,मुसलमान और हिंदू शत्रु कहते हैं ,उनके जवाब मैं कहता हूं मैं पहलेभारतीय हूं और राष्ट्रवादी हूं ।उन्होंने संविधान में उनकी समिति के अध्यक्ष बन कर जो काम किया वह काम ही अपना विचार बता रहा है।

        बाबासाहेब आंबेडकर बता रहे थे राजकीय क्षेत्र ही सर्वस्व नहीं है ।चुनाव की टिकट के लिए इधर उधर दौड़ना और भेदभाव खड़ेकरके चुनाव जीतना यह ठीक नहीं है ।मैं अपने जाति बंधुओं के लिए बना रहा हूँलेकिन भेदभाव होना नहीं चाहिए  राष्ट्रीयता औरअखंडता मेरी प्राथमिकता है ।स्वतंत्रता का मुझे महत्त्व है और यह सब काम के लिए मैं अपने खून के अंतिम बिंदु तक काम करता रहूंगालड़ता रहूंगा। 

      स्वयंसेवक संघ के साथ कई बार उनका मिलना हुआ था 1935 में पुणे में हुए शिविर में आए थे ।और बौद्धिक वर्ग भी लिया था ।१९३७ में वह विजयादशमी उत्सव में आए थे 1948 की साल में बाबा साहब और गुरु जी का मिलन हुआ था और प्रथम प्रतिबंध मेंबाहर निकलने के लिए सरकार को क्या कहा जाए उनकी चर्चा हुई थी ।और वह बात डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर ने सरदार पटेल कोकही थी ।और संघ पर प्रतिबंध दूर करना चाहिए यह बात कही था 1953 में बाबा साहब अंबेडकर स्थानिक चुनाव में खड़े थे तब उनकेसाथ उनकी मदद के रूप में दतोपंत ठेंगडीजीने काम किया था ।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में बता रहे थे कि आपकी  नियति अच्छीहै ,लेकिन आपकी पद्धति में गति बहुत धीमी है ,और मेरे पास इतना समय नहीं है ।परिणाम आने तक मैं तब तक नहीं रुक सकता ।इसलिए मैंने अलग रास्ता अपनाया है ।मैं चाहता हूं कि आप संघ के लोग दलित और मुस्लिमों के बीच में दीवार बनकर खड़े रहो और मैंदलित और कम्युनिस्ट के बीच में दीवार बनकर खड़ा रहूंगा। 

         राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने स्वयंसेवकों ने कालाराम मंदिर में जहां बाबा साहब और अनुयायीओको प्रवेश नही मीला था वहाँसमरसता देखते हुए थोड़े समय पहेले शकय हुआ मंदिर में दर्शन और प्रसाद का कार्यक्रम आयोजित किया था ।इतना ही नहीं गुरुवायूरकी यात्रा में  रहे सभी दलित बंधुओं का स्वागत और अन्य व्यवस्था की थी ।कर्नाटक में संतों की पदयात्रा ऐसे तथाकथित पिछड़े हुएवर्गों के निवास में भी की गई थी पेजावर पीठ के मठाधीश स्वामी विश्वेशतीर्थजी उस में रहे।

     पाकिस्तान के बारे में उन्हें विचार बहुत स्पष्ट थे ।थॉट्स ऑन पाकिस्तान नाम के पुस्तक में उन्होंने यह भविष्यवाणी की थी ।उन्होंनेदलितों को सलाह दी थी कि आप पाकिस्तान में रहे सब दलितों अपने जो साधन मिले वह साधन के साथ आप भारत  जाइए ।पाकिस्तान और निजाम के मुसलमान पर विश्वास  रखे ।वह आपको बता रहे थे क्या आप यहां रहिए और मुस्लिम लोग के साथ जुड़जाए यह कभी नहीं करना। 

      He said on 20th November 1949 that Muslim and Muslim league charge as they are with patient to make the Muslim has governing clause quickly as possible will never consider schedule cast I speak with experience .

     उन्होंने अपने बंधुओं को कहा था आप मुस्लिम और मुस्लिम लीग के यह विषय में कभी भी विश्वास ना रखें क्योंकि वह तो देशद्रोही हैउनसे तो आपको हाथ धोना ही पड़ेगा।

     जीवन में कुछ संदेश रूपी मंत्र कहे

उन्होंने स्त्री अधिकार के लिए स्वतंत्रता और हिंदू कोड बिल लाए 

उन्होंने कहा सब लोगों को कहा आप शिक्षित बने 

और स्वावलंबी बने ,संघर्ष के लिए संगठित परिश्रम करना ।सबको कंधे से कंधा मिलाकर काम करना ।बाहर का दिखावा नहीं लेकिनआत्मविश्वास के साथ काम करना ।आपको विश्व मानव बनना है ।आत्म दीपो भव और कैसे मेरे जीवन से ही मेरा संदेश मिलता है ।कभी मन में और अराष्ट्रीय विचार नहीं आना चाहिए ।अखंडता का रक्षण करना हमारा कर्तव्य बनता है ।आंदोलन से अधिकार मिलते हैंपरंतु मन परिवर्तन नहीं होता ।और बिन शिक्षित लोगों से शिक्षित लोग ज्यादा अधिक नुक़सान कर्ता अनैतिक हो सकते है ।इसलिएतैयार रहना जितना विज्ञान का महत्व का है ऐसा ही सब शिक्षण महत्व का है।

      सामाजिक समरसता के लिए और अन्य पशु पक्षी प्राणी और जीवन पर लोगों के लिए प्रेम रखने वाले अनेक उदाहरण हमारे समाजमें मिलते हैं ।संत नामदेव जब रोटी लेकर कुत्ता भाग रहा था उनके पीछे दौड़े थे ।और कहा कि आप घी लगा कर जाइए ।स्वामीरामकृष्ण परमहंस अपने काम करने वाले सफाई के कामदार के घर रात को जाकर  अपनी  बढ़ी हुई दाढ़ी से उनका कर साफ़  किया था।विवेकानंद स्वामी जो केरलमें भेदभाव और अस्पृश्यता देखते हुए कहा था केरल एक पागल खाना है , वही विवेकानंद ने एक नायी केयहां उनकी रोटी खाई थी ।और चमार का हुक्का पीया था। महात्मा गांधी ने पूरा जीवन में सदा अशपृश्यता  मिटाने का काम किया। 

       हमारे हिंदू संत महंत बता रहे हैं अस्पृश्यता कोई शास्त्र और धर्म के सम्मत  नहीं है ।बाबा साहब की इच्छा थी उसका निवारणआंदोलन का स्वरूप  बनकर समभावका बने।हिंदू सुधारक आंदोलन होना चाहिए      मुंबई में 1928 में पंडित आरके शास्त्री काक्षमता संघ द्वारा आंतरिक भोजन संयोजन में जब 500 महार जाति के लोग आये ,तो बाबा साहब वहां उपस्थित रहे थे ।चवदार तालाबके सत्याग्रह में लोकमान्य तिलक के पुत्र शुभकामनाएं भेजी थी।

      महात्मा गांधी जी के हरिजन शब्द के साथ डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर सम्मत  होकर  कहा था यह शब्द से लेकर एक आश्रितकी भूमिका हो जाती है।

बाबासाहेब आंबेडकर कहते थे कि मैं स्वतंत्रता की संघर्ष के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार हूं ।लेकिन मुझे यह विश्वास दिला दो किस्वतंत्रता के बाद मेरे समाज की स्वतंत्रता मिलेगी और उनका अपना अधिकार मिलेगा।

       डो अंबेडकर जीवन में कई अन्य समाजके उच्च लोगों ने उनके उत्थान के लिए काफी कुछ मदद की थी ।सातारा की प्राथमिकशाला में जब उनकी पढ़ाई शुरू हुई तब उनके गांव अंबडवे से उनकी अटक अंबडवेकर थी तो वहां के ब्राह्मण शिक्षक ने दूर कर कर उनकेपिता से संमति लेकर अपनी अंबेडकर दी थी।

      केलुसकर पी नाम के एक शिक्षक हमेशा उनके साथ रहते थे ।जब वह मैट्रीकुलेट हुए तब महार जातीक् सम्मान के समय औरशिक्षक ने उन्हें गौतम बुध की जीवनी भेंट किए थी। इतना ही नहीं बड़ोदरा के महाराजा गायकवाड से मिलकर उन्हों के बी..काग्रेजुएशन के लिए स्कॉलरशिप देने के लिए भी कहा था।

वही शिक्षक की बात पर बड़ोदरा के महाराजा गायकवाड ने डॉक्टर बाबासाहेब आंबेडकर को विदेश में पढ़ने के लिए भी भेजा था।

        बाबा साहब मिलिंद कॉलेज के प्रिंसिपल थे तब नवे आचार्य गजेंद्रगड़कर उनको लिया गया तो कई लोगों ने कहा कि आप पिछड़ीजाति के होते हुए ब्राह्मण शिक्षक को कब क्यों लिया तब उनका कहना था वह ब्राह्मण है इसलिए नहीं लिया योग्य प्राचार्य इसलिएलिया।

     1932  गोलमेज परिषद में डॉ बाबासाहेब आंबेडकर गए थे उन्होंने कहा था कि हमें हमारे बंधुओं के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र कीजरूरत है ।लेकिन महात्मा गांधी ने उनका विरोध कहा किया था ।उन्होंने कहा था मैं मानता हूं हिंदू समाज में जाति भेद है परंतु यहकुरीति है उनको दूर करने के लिए चाहिए और मैं इनके लिए प्रयत्न कर रहा हूं ।लेकिन अलग निर्वाचन क्षेत्र मुझे मंजूर नहीं है मैं समाजको बांटना नहीं चाहता ।उस समय उनको दूर करने के लिए महात्मा गांधी ने जब उपवास शुरू किया बाद में मालवीयाजी ने डॉक्टरअंबेडकर और गांधी जी के बीच में पूना पैक्ट हुआ ।न कोई जीता  कोई हारा ।डॉ बाबासाहेब आंबेडकर एक राष्ट्र के नेता के रूप मेंनिखार आए। 

          जब संविधान सभा का निर्माण हुआ तब जवाहरलाल नेहरू चाहते थे कोई विदेश से बड़े अच्छे संविधान के जानकार व्यक्ति कोभारत के संविधान बनाने का काम बताया जाए ।लेकिन महात्मा गांधी जी ने डॉक्टर बाबा साहब का नाम दीया और कहा जो प्रमाणिक हैनिष्ठावान है ज्ञात भी है  यह बात मान कर उनको संविधान सभा का अध्यक्ष बना दिया और उन्हें जो सविधान समर्पण किया ऐसा नमूनादुनिया में अन्य जगह नहीं मिलता है। संविधान में बाबा साहब ने निर्माण के साथ अस्पृश्य को समान अधिकार की बात की है ।अर्थशास्त्रके नाते उन्होंने ज्यादा योगदान दीया है ।वह हिंदू एनेथ्रोपोलेजीस्ट भी थे उन्होंने आर्य सिद्धांत का विरोध कहा था और कहा था आर्य कोईबाहर से नहीं आए  जब वह श्रममंत्री थे अंग्रेज की सरकारों में तब उन्होंने श्रमिकों के लिए काम करने का समय कम करना खाने पीने कीचीज देना और ओवरटाइम देना और दवाइयों की मदद करने का कहा था  उन्होंने जीते जी " रीडेल्स एफ हिन्दुइझमपुस्तक लिखा थालेकिन जीते जी वह पुस्तक का प्रकाशन नहीं किया 

        एम शिवराज के शब्दों में बताया जाए तो जीवन जीते डो बाबासीहेब का मूल्यांकन नहीं हुआ अब उनके जीवनके बाद कामूल्यांकन उनके जाने के बाद ज्यादा हो रहा है ।हमारे देश की कम नसीबी है जब महापुरुष जीवित होते तब उनको लोग इतना नहीं मानतेइतना उनके जाने के बाद बताया जाता है

     बाबा साहब ने लिखे हुए पुस्तक में राष्ट्रप्रेम का दर्शन होता है ।उनके समकालीन समाचार जब उन्हें देशद्रोही कह रहे थे कहीं लोगउनको भी अंग्रेजो के बगल बच्चे कह रहे थे तब उन्होंने राष्ट्रीयता की बात की है ।पीएचडी की डिग्री उन्होंने अंग्रेजों की खुशामद से नहींली है। क्वेश्चन ऑफ प्रोविंशियल फाइनेंस इन ब्रिटिश इंडिया ऐसी बात कर कर 25 वर्ष की छोटी उम्र में उन्होंने पीएचडी की डिग्रीहासिल की थी और यह उन्होंने महाराजा गायकवाड को समर्पित कीया था।

       यहां उन्होंने लिखा था ब्रिटिश सरकार का वहीवट कैसे चल रहा है ।किसान और कमजोर को शोषण की कैसी बात और सरकारउपेक्षा कर रही है ।वह बताएं

उन्होंने डीएसपी की पदवी ली और के लिए सरकार की आर्थिक नीति की बहुत टीका की थी।

      रिस्पांसिबिलिटी आफ रिप्रेजेंटेटिव गवर्नमेंट  रिसर्च पेपर ब्रिटेन में लिखकर उन्हें बहुत शोर मचा दिया था कि जैसे कोई क्रांतिकारीलिख रहा है।कहते थे दलितों की समस्या राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक  दूर करनी चाहिए ।मुसलमानों के अलग मताधिकार काविरोध कर रहे थे ।साइमन कमीशन के कई मुद्दे के साथ सहमत नही ।थे इस देश के नागरिक प्रथम भारतीय है अंत में भारतीय है औरभारतीय के सिवा और कुछ नहीं है ।उन्होंने रिपोर्ट एवं  इंडियन स्टेट्यूटरी में लिखा है

गांधी और जिन्ना की शब्दों में उन्होंने कहा कि मेरी बात मरोड़ तोड़कर लोग लिख रहे हैं ।लेकिन मैं कभी भी जिन्ना और मुस्लिम लीग केसाथ नहीं था मैं उनका टीका कार हु। प्रथम गोलमेज परिषद में भी कहा था कि दलित समाज की उन्नति करना मेरा धर्म है। तीसरीगोलमेज परिषद में उन्होंने राज्यों के अधिकार पर काम की बात की थी और कुछ पुख्त मताधिकार और महिलाओं के लिए विधेयक रखेथे।

     पाकिस्तान के बारे में वह बताते थे कि लाहौर मिंटो पार्क 1924 जीन्हा  से और मुस्लिम लीग ने अधिवेशन में अलग मुस्लिम राज्य कीमांग की थी ।थॉट्स ऑन पाकिस्तान में बताते हैं इसमें जो वर्णन है वह सिर्फ  पाकिस्तान तक नहीं है पाकिस्तान अफगानिस्तान आगेजाकर दारुल इस्लाम बनाने की योजना है।

उन्होंने लश्कर के अच्छे पुनर्गठन की बात की है।

        1942 में शेड्यूल कास्ट फेडरेशन अधिवेशन नागपुर में हुआ था और दलितों ने मुस्लिमों से अलग रहने के लिए उन्होंने सावधानी केबात  किए थे ।उन्होंने कहा था कि निजाम भी भारत का शत्रु है और उनके पर भी किसी दलितों को विश्वास नहीं रखना चाहिए ।जब वहश्रम मंत्री थे तब दुर्गादास ने लिखा है कि हम बैठकर सर्वोत्तम व्यक्ति थे 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के समय सब नेताओं को जेल मेंसे काले पानी की सजा देकर आंदामान निकोबार भेजने वाले थे उन्होंने उनका विरोध किया और कहा If you are going to do like this then I will resign from cabinet बाद मे रुकना पड़ा।

       स्वतंत्रता के समय पार्टीशन हुआ तब पाकिस्तान से आए हुए निराश्रित दलित को लेकर काफी कुछ काम किया ।इतना ही नहीं शेखअब्दुल्ला को भी बताया था कि आप कश्मीर का एकीकरण भारत से कर दो और वह ३७० कलम के विरोध में थे।

        जीवन के कुछ प्रश्न महाराष्ट्र में सतारा नाम का छोटा गांव वहां पीडब्ल्यूडी के स्टोर कीपर का काम कर रहे रामजी सकपाल केयहां १४ में संतान के रूप में एक बच्चा जन्म लेता है जब थोड़ा बड़ा होता है तो अपने माता-पिता को बताते हैं मुझे स्कूल में पढ़ने के लिएजाना है तब पिता ने बताया आप वहां नहीं पढ़ सकते है ।अगर आप जाएंगे तो वहां भेदभाव का अनुभव आपको होगा और आप सामनाकरना पड़ेगा  फिर भी वह तैयार हुए और उन्होंने प्रवेश लिया  दूसरे विद्यार्थी उनके साथ नहीं बैठते थे ।सबका खाने-पीने का भी अलगरहता था ।उनको बैठने का क्रम पैरों के जूते रखने की जगह रहते थे और बाबासाहेब आंबेडकर कभी ब्लैक बोर्ड पर जाकर कुछ लिख भीनहीं सकते थे क्योंकि अन्य विद्यार्थियों के टिफिन वहां रहते थे।

     छोटी उम्र में माता का निधन होने जाने के बाद पिता और सब संतान मुंबई में एक छोटे से कमरे में रहे ।वह छोटे से कमरेमे रहकरउनके लिए सोने का खाने का पीने का और सबके लिए रूम था ।सरकारी स्ट्रीट लाइट में पढ़कर उन्होंने  मेट्रीक्युल्ट कीया  महारजातियाँ पहेली वह पास होनेस् उनका सम्मान किया गया और वही समय उनके पुराने शिक्षक केलुस्करने उन्हें गौतम बुध की जीवनी कीपुस्तक भेंट नहीं थी। उनके अभिप्राय से बड़ोदरा के राजा गायकवाड़ ने उन्हें  ७० रुपया स्कॉलरशिप दी और उन्होंने एलफिंस्टन कॉलेज मेंप्रवेश लेकर बीए की डिग्री 1912 में हासिल की ।थोड़े समय के लिए उन्होंने नौकरी थी ।उस समय उनका लग्न हो गया था लेकिनपिताजी की मृत्यु 1913 में हो गई वह अकेले पड़ गए।

      जब वह विदेश में गए तब इकोनॉमिक्स के विषय में उन्होंने पीएचडी की ।कोलंबिया यूनिवर्सिटी के वह सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी रहे ।सोशल रजिस्ट्री और एंथ्रोपोलॉजी उनके विषय थे ।मिशन -डिवाइडेड कास्ट सिस्टम इन इंडिया इस विषय पर उन्होंने स्टडी कीया  

         अपना अभ्यास पूर्ण करने के बाद जब महाराजा गायकवाड के यहां नौकरी में लगे तब उन्हें काफी कुछ भेदभाव का अनुभव हुआ।उनका टेबल और कुर्शी ऑफिस में एक कोने में रखी जाती थी ।वहां का पीयुन उनको पानी भी नहीं देता था ।चलने के लिए जाजमनिकाली जाती थी ।इतना ही नहीं फाइल भी हाथ से नहीं देते हुए फेंकते थे ।बड़ोदरा में कुछ रहने का स्थान भी नहीं मिला एक पारसीहोटल में फर्जी नाम से रहे उन्होंने थोड़े दिन बाद मालूम ने के बाद निकाल दिया ।फिर वह बड़ौदा छोड़ दीया 

      थोड़े समय उन्होंने इन्वेस्टमेंट के लिए काम किया लेकिन वहां भी डो काम लाता था जो उनको दलित समझ कर उनके पास कामकरने के लिए तैयार नहीं थे ।बाद में उन्होंने सिडन हम कॉलेज में पॉलिटिकल इकोनॉमिक्स के विषय के प्रोफेसर काम किया इस समयभी स्टाफ रूम में उनके पानी के पीने का स्थान अलग रहता था ।कोल्हापुर के राजा साहू ने उनको इकोनॉमिक्स के अभ्यास के लिए लंदनभेजने में मदद की थी। 

      उन्होंने अपने जीवन में अपने दलित बंधुओं को अगर लेने के लिए संघर्ष की मानसिकता खड़ी करने के लिए चवदार तालाब में पानीपीने के लिए सत्याग्रह किया था ।अपने कालाराम मंदिर के दर्शन का भी सत्याग्रह किया था ।पंढरपुर यात्रा के लिए जो पत्नी ने कहा तोउन्हें ना  कहीं और कहा की मै दूसरा पंढरपुर खड़ा करूंगा।

        1936 में इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी उन्होंने खड़ी की थी और १९३७मुंबई में इलेक्शन भी लड़ा था। सरकार में श्रम मंत्री रहे थे ।डिफेंसएडवाइजर पी रहे थे और वायसरॉय एग्जीक्यूटिव काउंसिल के मेंबर थे ।राज्य सभा के मेंबर भी कांग्रेस की सरकार के  बने थे औरजवाहरलाल नेहरू के प्रधानमंत्डलमे क़ायदा मंत्रीक् स्थान पर थे। 

     पढ़ने के लिए क्या कुछ करना चाहिए विदेश में पढ़ रहे थे और पत्नी के पास पैसा नहीं था तो उन्होंने लिखा था आपके पास कितनापैसा है चला लो जरूरत पड़ने पर अपने गहने बेच डालो।संविधान सभा मे 7 सदस्य थे लेकिन सभी नियमित नहीं थे ।कोई बाहर गांव थे।कोई बीमार रहता था ।कोई अटेंड नहीं करता था ।उन्होंने अकेले हाथ में उसने संविधान निर्माण किया था। 

      आज के समय में संपूर्ण देश की अखंडता के लिए गए और राष्ट्रीय एकता के लिए समाज के सभी वर्गों को एक साथ मिलकर रहनापड़ेगा ।यह सामाजिक समरसता के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित अनेक देशभक्त व्यक्तिपरक  संगठन और समाज मे काम कररहे हैं ।हम कहीं भी हो ऐसे अच्छे काम में जुड़ कर अपना जीवन भारत माता की भक्ति में प्रदान करें ऐसी अभ्यर्थना

Saturday, January 1, 2022

Hindutva paradigm

આજે આપણું સદભાગ્ય છે કે ખ્રિસ્તી નવા વર્ષના પ્રથમ દિવસે "હિન્દુત્વ પેરેડાઇમ "વિષય લઈને રાષ્ટ્રીય સ્વયંસેવક સંઘના પ્રચારક ,અખિલ ભારતીય કાર્યકારણ સદસ્ય , જેમના નામમાં જ રામ અને કૃષ્ણ -માધવ છે ,એવા વિચારક ,ચિંતક, લેખક આપણી વચ્ચે એક વિષય રજૂ કરવા જઈ રહ્યો છે
હિન્દુત્વ પેરેડાઇમ પોતાના પુસ્તક ના વિષયે આપણી સાથે વાત કરવાના છે.
આજકાલ હિન્દુત્વની વધતી સ્વીકાર્યતા અને વધુ તો સુડોસેક્યુલર ના વિરોધના કારણે અને સમાજની સજ્જનનોની જાગૃત અવસ્થા અને વૈચારિક શક્તિ ના કારણે આજે આ વિષય હિન્દુત્વ વધુ પ્રાસંગિક બન્યો છે.
હિન્દુત્વ ,ભારતીય અને માનવત્વ વચ્ચે વધુ તાત્વિક તેમાં કોઈ તફાવત નથી .મૂળ સંદર્ભ અને અર્થ એક જ છે .જેમ મૈથિલી ,જાનકી કે સીતા કહીએ છીએ તેમ જ તફાવત છે .એવો જ તફાવત સમજવાનો છે.
હિન્દુત્વ સર્વ સમાવેશક છે. Inclusive છે .તમે સંસ્કૃત માં Exclude નો કોઈ સમાનાર્થ નહી મળે.હિન્દુત્વની અંદર
સર્વે ભવન્તુ સુખીન
વસુદેવ કુટુંબકમ વિષય પ્રસ્તુત થયેલા છે
રાષ્ટ્રીય સ્વયંસેવક સંઘના પ્રચારક, રાજકીય ક્ષેત્રમાં જનસંઘના સ્થાપનાકાળથી જ જોડાયેલા ,ઋષિ પરંપરા જેવું જીવન રહ્યું ,આપણી વેદકાળથી ચાલી આવતી સંસ્કૃતિના શાશ્વત વિચારોનું યોગાનુકુળ પોતાના શબ્દોમાં રજુ કરનાર પંડિત દીનદયાળ ઉપાધ્યાય નું એકાત્મમાનવ દર્શન ( integral humanism) વિચાર તરીકે ઓળખાય છે .આ વિચારને વધુ લોકો ઉપયોગી ,અનેક લોકો સમજી શકે એવા શબ્દાર્થ અને ભાવાર્થ સાથે રામ માધવજીએ આ પુસ્તક માં મુક્યો છે.
હિન્દુત્વની સ્વીકાર્યતા વધતી જાય છે .હિન્દુત્વની સાથે જોડાયેલા યોગ અને આયુર્વેદ અને વિશ્વની પ્રસિદ્ધિ મળી છે .સ્વીકાર્ય છે ભારતીય સત્તાની અન્ય દેશોની અંદર મહેમાનગીરી આતિથ્ય અને વધુ સ્વીકાર્ય થયા છે .અમેરિકાનું એક ન્યુઝ મેગેઝીન અને સર્વે કર્યો અને કહ્યું કે અમેરિકાના લોકો વધુને વધુ માનતા થયા છે કે "બધા ધર્મો સરખા છે "આ શુ દર્શાવે છે કે અમેરિકા હિન્દુ થઈ રહ્યું છે
ત્યારે આ વિષય ચર્ચાસ્પદ બને એ સ્વાભાવિક છે .હિંદુત્વ છે એટલે જ સ્વામી વિવેકાનંદને પોતાના શિકાગો પ્રવચનમાં તેનો ઉલ્લેખ કર્યો હતો
I belongs to the ancient tradition the monk of the world
I belongs to the mother of all religions of the world and
I belongs different sects and section class of crores of Hindu
એટલું જ નહીં એમ કહયુ -ગર્વ સે કહો હમ હિન્દુ હે
હિન્દુત્વમાં ભાવ છે
ઇજન નહી
Hinduism નહી
હિંદુત્વના વિષયમાં સમાજમાં કહેવાતા બુદ્ધિજીવીઓ pseudo secular દ્વારા ફેલાવાતાં સંભ્રમનો જવાબ આપેછે આ પુસ્તક
હિંદુત્વને કટ્ટર કરનારા સમજી લે હિન્દુત્વ કદી હાર્ડકોર બની ન શકે .બિનસાંપ્રદાયિકતાના આ દેશના બંધારણમાં આવ્યા પહેલા પણ અહીંયા બિનસાંપ્રદાયિકતા હતી અને છે અને રહેશે તેનું એકમાત્ર કારણ હોય તો બહુમત સમાજની અંદર રહેલી હિન્દુત્વની વિચારસરણી
હિંદુ શબ્દ બોલવાથી નાકનું ટેરવું ચડાવમાર બૌદ્ધિકો માટે આ પુસ્તક માટે છે.
જેટલું મહાત્મા ગાંધીજીનો અહિંસા નો આગ્રહ ,સત્યાગ્રહ વિષય મહત્વનો છે એટલું દિન દયાલ ઉપાધ્યાય integral humanism એકાત્મ માનવ દર્શન ઉપયોગી છ
East and west book written by Ekeda and Arnold toynbi કહ્યું છે કે વિકસતા વિજ્ઞાન અને ઉદ્યોગનો અંતિમ અધ્યાય જો ભારતનો નહી હોય તો દુનિયાનો વિનાશ થશે .હિન્દુત્વ આપણા દેશની સંસ્કૃતિ ઓળખ છે.
આ પુસ્તક એકેડેમીક પુસ્તક છે .પરંતુ વ્યવહારમાં મૂકવાથી એના સિદ્ધાંતનો વ્યવહારિક સાર્વજનિક રાષ્ટ્રીય અને વૈશ્વિક ઉપયોગ થઈ શકે છે .આજકાલ હિંદુત્વને savarkar hindutva ,હિન્દુ મહાસભા હિન્દુત્વ , વિવેકનંદ અને સંઘનું હિન્દુત્વ એવા ભાગ કરી રહ્યા છે.
હિન્દુત્વ ઓલ્ટરનેટિવ World view બની શકે છે કેવી રીતે European view.
Hindutva જમણેરી શબ્દનો ઉપયોગ માં આવે છે પરંતુ સંઘનો અને સંઘના કાર્યકર્તાઓ નો વિચાર નથી જમણેરી નથી ડાબેરી. એટલે સંઘના સારુ કહેવાય તો not right not left. આ પુસ્તકને આપણે ચાવીએ પચાવીએ પચાવી let's chew and digest
આ પુસ્તક ગઈકાલ અને આજ ના કરતાં આવતીકાલ માટે વધુ છે .ભારતના પુરાતન વિચારોને આજના સંદર્ભમાં વિચારીએ.

શ્રીમદ્ ભગવદ ગીતા અને કુટુંબ વ્યવસ્થા


સૌરાષ્ટ્ર યુનિવર્સિટીની ભારતીય સંસ્કૃતિ ચેર દ્વારા આયોજીત "શ્રીમદ્ ભગવદ ગીતા અને કુટુંબ વ્યવસ્થાવિષય પર બીજરુપ વ્યાખ્યાનપ્રમુખ સ્વામી ઓડીટોરીયમ , રાજકોટ દિનાંક ૩૧.૧૨.૨૧

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પૂજ્ય પાંડુરંગ દાદા ની સ્મૃતિમાં સૌરાષ્ટ્ર યુનિવર્સિટી ખાતે સાંસ્કૃતિક ચેરના ઉપક્રમે આજે શ્રીમદ્ ભગવદ્ ગીતા અને કુટુંબજીવન વિષય ઉપર આપણે થોડું મનોમંથન કરવા જઈ રહ્યા છે .પૂજ્ય પાંડુરંગ દાદા કે જેમના જન્મ પહેલા મા પાર્વતીને જોઈને ભિક્ષુક બનીને આવેલા સંતે કહેલું કે આવનાર બાળક  મહાપુરુષનો અંશ છે. આ ભવિષ્યવાણી સાચી થઈ આવી .ભવિષ્યવાણી સાચી ઠેરવ નાર  સ્વાધ્યાય પ્રવૃત્તિના પ્રણેતા ,સમાજ પરિવર્તન ના સૂત્રધાર ,સમાજના ગરીબ પછાત અને માછીમાર વર્ગ સુધી પહોંચીને ધર્મ અને આધ્યાત્મનો સંદેશો પહોંચાડી ને સમાજ જીવનમાં એક વ્યાપક બદલાવ લાવનાર ,એટલું જ નહીં પરંતુ ભક્તિ ફેરી -ભાવ ફેરી જેવા અન્ય ઉપક્રમો દ્વારા સમાજને  પ્રેરણા આપીને જેમને મેગેસસે ટેમ્પલટન એવોર્ડ મળ્યો હતો ,એવા વૃક્ષમંદિર અને સામૂહિક ખેતી દ્વારા ગ્રામિણ વિસ્તારોમાં ક્રાંતિકારી પરિવર્તન કરનાર પૂજ્ય પાંડુરંગ દાદાના વિચારો લઈને આજે આપણે ગીતાનો સંદેશ -કુટુંબજીવન કેવી રીતે આદર્શ બની શકે છે વાતકરીશુ. કુટુંબ માટે ગીતામાં પણ શું સંદેશ આપ્યો છે ?આજની પ્રવર્તમાન સ્થિતિ ની અંદર શું કરવું જોઈએ .

        ચાલો પૂજ્ય પાંડુરંગ દાદા ના બચપણ ના જ એક પ્રસંગ થી શરૂઆત કરીએ પોતાનો જન્મ સ્થાન અને રોહા ગામમાં બચપણમાં એમણે એક ઘટના નિહાળી .પોતાના જ ગામમાં એકે  ઘરે અનેક લોકોને ભોજન ચાલી રહ્યું હતું અને બધા ભોજન કરી રહ્યા પછી બહાર ફેંકાતા એઠા પતરાળામાંથીવ ઘણા લોકોને ટોળે વળીને એ પતરાળામાંથી  વધેલા ખોરાક મેળવવા માટે પડાપડી કર્યા હતા .નાના બાળકોથી માંડીને વૃદ્ધો સુધી?હતા .સમાજની સ્થિતિ એક તરફ કોઈના ઘરે સુંદર સુગંધી ભવ્ય ભોજન થયું છે અને બીજી તરફ સમાજનો એક વર્ગ છે જે એઠાં પતરાળાં થી પોતાનું પેટ ભરવા માટેનો અનાજના દાણા  વીણી રહ્યો છે .તેમનું હૃદય દ્રવી ઉઠ્યું .માનવ-માનવ વચ્ચેના ભેદભાવ દૂર કરવા શું કરવું જોઈએ અને ગીતાનો સંદેશ "આત્મવત્ સર્વભૂતેષુ "પહોંચાડવા માટે પોતાનું જીવન  સમર્પી દીધું.
        એક વખત દાદીના ખોળામાં બેઠેલા બાળ પાંડુરંગે ચંદ્રને જોઇને પ્રશ્ન પૂછ્યો હતો કે દાદી ચંદ્રને  ઠંડી નહી લાગતી હોય !આવા સજીવનિર્જીવ વચ્ચેનો ભેદ જેમને મન દૂર છે એવા પાંડુરંગ દાદા એ ગીતાને ફક્ત ભારતમાં જ નહીં વિશ્વભરમાં સમાજ જીવનનો સંદેશ લાવવા માટે પ્રખ્યાત કરીને જય યોગીશ્વરનો નાદ ગુંજતો કર્યો . 

मातृवत् परदारेषु, परद्रव्येषु लोष्ठवत्।
आत्मवत् सर्वभूतेषु, यः पश्यति सः पण्डितः।

जो दूसरों की पत्नी को माता तथा दूसरे के धन को मिट्टी के ढेले की भांति समझता हो। जो संसार के सभी प्राणियों में अपने आत्मा का दर्शन करता हो अर्थात सबको अपना मानता हो वही पंडित है।

         આત્મવત્ સર્વભૂતેષુ એટલે કે સમસ્ત જીવો સહિત દરેક જગ્યાએ પરમેશ્વરને સમભાવથી જોવો. તે જ ખરેખર સાચું જોઈએ છે .એટલે એ બાળ પાંડુરંગને એ ભૂખ્યા દેખાતા લોકોમાં પણ એ જ ભગવાન પરમાત્મા ના દર્શન થયા હતા .આપણા સમાજની સ્થિતિમાં દેશનો એક મોટો એવો વર્ગ તેમને ખાવા પીવા માટે પૂરતું અનાજ નથી મળતું કે નથી ,પહેરવા માટે પૂરતા કપડા મળતા રહેવાની અને રહેવાના સ્થાનની ચિંતા દેખાય છે.  સ્વથી ઉપર ઉઠીને સમાજની ચિંતા કરવાનો સંદેશ કુટુબજીવનનો પાયો બંને તો સ્વર્ગ ઉતરે 
     બધાજ સંજીવની અંદર એ પશુ-પક્ષી પ્રાણી કીટક હોય ત્યાંથી માંડીને સજીવ અને નિર્જીવ બધામાં એક સરખા ઈશ્વરનો વાસ છે.ગીતાની આ વાતથી ફક્ત કુટુંબના દરેક સભ્યો પૂરતી ન રહેતા સમાજમાં વસતા બધાજ વ્યક્તિઓને સમભાવનો સંદેશ છે સામાજિક સમસ્યાના સંદર્ભમાં દરેક પરિવારે આ ભાવ રાખી આચરણ કરતા , વ્યષ્ટિ થી સમષ્ટિ સુધીનો વિચાર ગીતા આપે છે જેમ જળમાં તરંગ છે તેમ વ્યક્તિ માત્રમાં પરમેશ્વરની વાસ છે.ભૌતિકતાની સાથે વિચાર ભાવ કુટુંબને સાચું સમાજ નું મંદિર બનાવ્યું છે કઈ તરફ લઈ જાય છે આ જ સાચી પ્રગતિ છે 

        ગીતા એટલે ભગવાનનો સીધેસીધો ડાયરેકટ અર્જુન ના માધ્યમથી સંપૂર્ણ સમાજ અને વિશ્વ માટે આપેલો એક સંદેશ .અન્ય ધર્મ કે સંપ્રદાય માં પોતાનો સંદેશવાહક મેસેન્જર કે પયગંબર મોકલ્યા છે .પરંતુ અહીં તો ભગવાન શ્રીકૃષ્ણ જાતે જ ધર્મક્ષેત્ર કુરુક્ષેત્રમાં ઊભા રહીને મહાભારતના મધ્યમાં ૭૦૦ શ્લોકો દ્વારા ભગવાન વેદ વ્યાસના હસ્તે આપણને સંદેશ આપે છે .મેનેજમેન્ટ થી માંડી આર્થિક , ભક્તિથી માડી સમાજજીવન સુધી ,વ્યક્તીથી માંડીને કુટુંબજીવન સુધીના દરેક વિષયોને આવરી લેતી એ ગીતાને આજે આપણા કુટુંબ જીવનના સંદર્ભમાં જોવાની છે .જે ગીતા ઉપર પૂજ્ય ગાંધીજી ,વિનોબાજી , ટિળકજી સહિત અનેકોએ લખ્યું છે એટલું નહી પોતાના ઉદાહરણો દ્વારા પ્રસ્તુત કર્યુ છે.આમ તો કહેવા જઈએ તો એમ કહેવાય છે કે "હરિ અનંત ,હરિ કથા અનંતા ". ગીતા વિશે પણ આમ કહી શકાય.   IQ. નહી EQ મહત્વનો છે . કુટુબજીવનનો આ સંદેશ વ્યક્તિ નિર્માણના માધ્યમથી કહેછે. 

      બાળ પાંડુરંગ જ્યારે દેશના શાળામાં ભણતા હતા ત્યારે અન્નાના શિક્ષકે આગાહી કરેલી કે ભવિષ્યમાં તે બોલશે અને સાંભળનારા લોકો લખશે. આજે પૂજ્ય પાંડુરંગ દાદા નથી પરંતુ તેમના પ્રવચનો ,તેમના ભાષણો ,તેમના વિષયો પરની વાતો અનેક પુસ્તકોમાં આજે ઘરે ઘરે વંચાય છે.એટલું જ નહીં પરંતુ વિશ્વની અંદર નો પ્રચાર થઈ રહ્યો છે .આજે તેમના એ ભવ્ય આપણે આજે સૌરાષ્ટ્ર યુનિવર્સિટીના માધ્યમથી આ ચેરના માધ્યમથી આજે ગીતા અને કુટુંબ જીવન ને યાદ કરી રહ્યા છે .તેમણે પોતાના જીવન દરમ્યાન એશિયાટિક લાઇબ્રેરીના નવલકથા સિવાયના બધાં જ પુસ્તકો વાંચ્યા હતા અને ત્યાં સુધી લાઈબ્રેરીયનને પણ કોઇ પુસ્તક લાયબ્રેરીમાં ક્યાં પડ્યું છે ખબર ન હોય તે દાદાને ખબર હતી.

      આપણા મનમાં વિચાર થાય કે શા માટે આ વિષય આજે યાદ કરવો જોઈએ .પરંતુ કહેવાય છે ને કે કળિયુગ ની અસર આવી છે કહો કે .આજના પશ્ચિમની વાતાવરણે આપણા દેશને અને સમાજને દૂષિત કર્યુ છે .આજે સંયુક્ત પરિવાર તૂટી રહ્યા છે .વિભક્ત પરિવારોની સંખ્યા વધી રહી છે .પરિવારો નાના થતા જાય છે પરિવારના સભ્યો વચ્ચે સહન શક્તિ ઘટી જાય છે .ટીવી અને સીરીયલ એવા અનેક માધ્યમથી સંઘર્ષ  વધ્યા છે અને યાદ આવે છે ક્રિશ્ના શાહે બનાવેલું એક અંગ્રેજી મુવી rivals જેમાં એક છૂટાછેડા લીધેલ મહિલા પોતાના બાળકને લઈને બીજા લગ્ન કરે છે પરંતુ બીજા લગ્નમાં બાળકને પિતાનો પ્રેમ ન મળતા પોતાની માતાના નવા પતિ એટલે નવા પિતા ને મારવા માટે અનેક પ્રયત્નો કરેછે. અમેરિકા જેવા દેશની અંદર વિદ્યાર્થીઓમાં ગન કલ્ચર વધી રહ્યુ છે .આપણા દેશમાં પણ ટીનેજર્સને સંઘર્ષ ક્યારેક ખૂનામરકી સુધી પહોંચવાના પ્રસંગો દેખાય છે .આત્મહત્યાનું પ્રમાણ વધી રહ્યું છે .ગુનાખોરીનો ગ્રાફ વધી રહ્યો છે .ક્યારેક કુટુંબ કેવી રીતે બનાવવું કોઈ એક પુરુષ અને સ્ત્રી હોટલમાં મળે સરખી વસ્તુ નો ઓર્ડર આપીને તેઓ અને લગ્ન કરવા માટે તૈયાર થઈ જાય આવી જ સ્થિતિ છે .ત્યારે પરિવાર નો સાચો ઉદ્દેશ્ય ફરીવાર એ શું લગ્ન કરીને બાળકો ઉત્પન્ન કરીને પોતાનો સ્વાર્થ સિદ્ધ થશે તે કરવા માટે છે જ નથી પરંતુ એના પરિવાર નો હેતુ વ્યક્તિથી ઉપર ઊઠીને પોતાના પરિવારના દરેક સભ્યોના કર્તવ્ય દ્વારા સમાજને શ્રેષ્ઠ બનાવી રાષ્ટ્રને આગળ લઈ જવું અને સમગ્ર સૃષ્ટિનું કલ્યાણ થાય એ માટે કુટુંબ એક એકમ છે . આના માટે આપણી આદર્શ હિંદુ ભારતીય કુટુંબ જીવન પદ્ધતિ નો આદર્શ સર્વશ્રેષ્ઠ છે 
          એક વખત ઇંગ્લેન્ડ ની અંદર હિંદુ સ્વયંસેવક સંઘના એક મકરસંક્રાંતિ ઉત્સવ માં આવેલ માર્ગીરેટ થ્રેચરે  કહ્યું હતું કે આપની હિન્દુ કુટુંબજીવન પદ્ધતિમાંથી અમારે ખૂબ બધું શીખવાનું છે .એક વખત એક ઘટના ઘટી હતી અડધી રાત્રે કેટલાક યુવાનોએ લન્ડન ની ઘણી બધી દુકાનો અને મોલ ના કાચ તોડીને તોડફોડ કરી હતી .આવા પકડાયેલા ગુનેગારોનો જ્યારે માનસિક અભ્યાસ કરવામાં આવ્યો ત્યારે જણાયું કે તેમાંથી કેટલાયને માતા પિતા ન હતા અને સિંગલ પેરેન્ટ હતા .પરિવાર નો સાચો પ્રેમ અને સંસ્કાર ન મળ્યા હોય .ત્યાં આવી ઘટનાઓ ઘટે છે અને સ્વામી સચ્ચિદાનંદ પણ એક પ્રવચનમાં કર્હયુ કે જ્યારે હું અમેરિકામાં વૃદ્ધાશ્રમની મુલાકાતે આવ્યો ત્યારે તેના એક સ્થાનિક વૃદ્ધે આંખમાં આંસુ સાથે કહ્યું કે મારો બીજો જન્મારે ભારતમાં લેવો છે કારણકે હિન્દુ કુટુંબ જીવન પધ્ધતિ શ્રેષ્ઠ છે.
        ગીતાનો સંદેશ કુટુંબને સાચવી રાખવા માટે વ્યવસ્થિત રાખવા માટે શું કરવું પડશે ?સહન શક્તિ વધારવી પડશે સહાનુભૂતિનું પ્રમાણ વધારવું પડશે .પરિવાર ને સફળ બનાવવા પડશે દરેક વ્યક્તિએ કંઈક છોડવું પડશે .દરેક વ્યક્તિએ પોતાનો કર્તવ્ય નિભાવવું પડશે ત્યારે કર્તવ્ય કોઈ નિભાવે છે તો બીજાનો અધિકાર એની મેળે સચવાઈ જાય છે .સમુદ્રાન્તિકે  ધ્રુવ ભટ્ટની નવલકથા એક પરિવારમાં ગાન્ડા કાકાને સાચવતી ઘરની મુખ્ય સ્ત્રી કે જે બાળકો માટે રાખેલું ઘીની સુખડી બનાવવાની ગાન્ડા કાકા ઢોળી નાંખે ત્યારે બાળકોને કેવી રીતે સમજાવે છે .આવી એક સંગઠિત કુટુંબનો ચિત્ર નો સંદેશ જરુરી છે.
       ગીતા ની અંદર કહયુ છે 
" कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।

मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि 
   શું એક શ્લોક અર્જુન માટે જ છે ? ના સમાજ જીવનના દરેક ક્ષેત્રો માટે આ શ્લોક છે. 
 
       આ શ્લોક ની અંદર પણ કહ્યું છે કે દરેક વ્યક્તિ પોતાનું કર્તવ્ય કરવું પડે .કર્મ વગર કોઈ વ્યક્તિ રહી શકતી નથી પરંતુ આ કર્તવ્ય ની પાછળ કોઈ અધિકાર ની ઈચ્છા હોવી ન જોઈએ કારણ કે એકના કર્તવ્ય બીજાનો અધિકાર સચવાઈ જાય છે .પુત્રના કર્તવ્યમાં માતા-પિતાનો અધિકાર અને માતા-પિતાના કર્તવ્યમાં પુત્ર-પુત્રીના અધિકાર આવી જાય છે .મહાત્મા ગાંધીજીને વિશ્વના અધિકારોનું ચાર્ટર માટે પૂછ્યું ત્યારે કહેલું કે અધિકારીનો ચાર્ટર હોવો જોઈએ નહી પરંતુ કર્તવ્યોને યાદી હોવી જોઈએ. 
             ભગવાન શ્રીકૃષ્ણ કહે છે પરંતુ સાંભળવાનું તો આપણે બધાને છે કે કર્તવ્ય કર્મ કરવા માટે તારો અધિકાર છે ,ફળોમાં કદી નહીં. આપણા બધા જ કામો ઈશ્વરને અર્પણ કરીએ .આપણા માટે ઈશ્વર એટલે પરિવાર, સમાજ, રાષ્ટ્ અને વિશ્વ છે. સૃષ્ટિ અને પરમેશ્વરને અર્પણ કરવાના ભાવથી જે નિષ્કામ કર્મ કુટુંબમાં થાય
ત્યાં અવશ્ય સુખ શાંતિ અને સમૃદ્ધ આવે.કરે છે . આ ભાવ ફક્ત વ્યક્તિ સુધી નહીં ,પરંતુ પરિવારમાં હોય તો પરિવારમાંથી સમાજમાં આવે અને સમાજમાંથી બધી જગ્યાએ જાય છે.વ્યક્તિગત અને પરિવારના ઉત્થાન માટે અસફળતાના વિચારને એક બાજુ મૂકીને મનમાં ફળની ચિંતા રાખ્યા વગર કર્મ કરવાથી ,સફળતા મળતી હોય છે. પોતાનુ અન્યન્ આપવાના ભાવથી થતુ કાર્ય ઇશ્વર અર્પણ ભાવ અને મળેલ ફળ ઇશ્વર પ્રસાદ રુપે સ્વીકારતા બધીજ નિરાશા અને દુખ દૂર ભાગે છે.ખરેખર કુટુંબ જીવનના દરેક સભ્યો આ સૂત્ર ને અનુરૂપ રહીને પોતાનું જીવન જીવે તો મને લાગે છે એક આદર્શ  કુટુંબનું નું કૃષ્ણ ભગવાન નો પરિવાર આપણી સમક્ષ ખડો થાય. 
        
           सर्वोपनिषदो गावो , दोग्धा   गोपाल नन्दन:|
            पार्थो वत्स: सुधीर्भोक्ता , दुग्धं  गीतामृतं महत् ||
ઉપનિષદો રૂપી ગાયને ગોપાલ નંદન એટલે કે ભગવાન શ્રીકૃષ્ણએ પાર્થ वत्स માટે દૂધ રૂપી ગીતામૃત દોહીને આપે છે .શા માટે દૂધને ગીતા સાથે સરખાવ્યું છે.  છે કારણ કે દૂધની સંપૂર્ણ ખોરાક છે બાળકથી માંડીને વૃદ્ધો બધા માટે ઉપયોગી છે .ભગવતગીતા માટે પણ બધા માટે યુનિવર્સલ ફૂડ છે અને પોષણ આપે છે .સામાન્ય માણસથી ઋષિઓ સુધી સમજી શકાય એવા શબ્દો છે .ચાલો આપણે બધા જ અર્જુન બનીએ.

          સમાજ માટે કુટુંબમાં શું જોઈએ ? કુટુંબે સમાજને પણ સંદેશ આપવાનો છે એકાત્મતાનો ,સમાનતાનો ,સમષ્ટિના અનેકત્વ અને સમભાવમાં પરમાત્માના દર્શન કરવા .એટલું જ નહીં એ જ સાચુ જ્ઞાન છે, શ્રેષ્ઠ જ્ઞાન છે.આનાથી  ક્ષમા ઋજુતા આવે છે એટલું જ નહીં બાકીની અન્ય વ્યક્તિઓને પણ સરખી માનવી .ભગવાને ગીતામાં કહ્યું છે કે જેવી રીતે પર્વતોમાં જુદા જુદા સ્થાને માંથી નીકળતી નદીઓ અંતે તો સમુદ્રને મળે છે એમ મારા ભક્તો કે સમાજની દરેક વ્યક્તિ કોઈપણ રસ્તેથી જ્યારે ભક્તિ કરે છે અને તે મને જ મળે છે . સ્વામી વિવેકાનંદ શિકાગો વિશ્વધર્મ પરિષદમાં આ વાત કરીને કરીને  હિન્દુ મોન્ક વોરિયર ના નામે સમગ્ર દુનિયાને ચકિત કરી દીધી હતી .જે કુટુંબમાં આનું દર્શન થાય તે સમાજ ઉત્કૃષ્ટ સ્થાને પહોંચાડે છે. 

           ભગવાન કૃષ્ણ એ ગીતામાં કહ્યું છે કે દરેક વસ્તુનો આદિ મધ્ય અને અંત અવિનાશી હું વાસુદેવ છુ.દુનિયાની બધી જ વિભૂતિઓ માં સર્વશ્રેષ્ઠ વસ્તુઓ પણ ભગવાન રૂપ છે એટલું જ નહીં વિશ્વરૂપદર્શન બતાવે છે સમગ્ર જગત તેમાં સમાયેલું છે.આ માનવામાં આવે તો સમાજમાં સમરસતા એની મેળે આવી જાય પ્રાંતવાદ ,ભાષાવાદ ,જાતિવાદ ,ભેદભાવ ,અસ્પૃશ્યતા જેવા અનેક પ્રશ્નોનો ઉકેલ આવે .પરંતુ કુટુંબના દરેક વ્યક્તિમાં ગીતાનું વાંચન, પઠન, મનન અને આચરણ થાય .ગોવિંદ ભગત ગામના રામકૃષ્ણ એક્ષ્પોર્ટ ના હીરાના માલિક સુરતમાં રહે છે એમની પાસે જ્યારે કોઈ વિદ્યાર્થી સ્કોલરશીપ લેવા આવે ત્યારે કહે છે કે એક અધ્યાય ગીતાનો મુખપાઠ કરીને આવો પછી હું આપીશ .ગીતાને સમાજમાં આ રીતે ખૂબ પ્રચલિત કરવાની અને ગીતા નું આચરણ જીવનમાં આવે એ કરવા માટે ની જરૂર છે. 

      આમ જોવા જઈએ તો આપણા કુટુંબ જીવનમાં સમાજ ભક્તિ એટલે કે રાષ્ટ્રપતિ એ જ સાચો ભગવાન નો ભાવ છે.ભગવાનનો વિશ્વરૂપ દર્શન છે ભગવાન કહે છે મારે સહસ્ત્ર હાથો જે સહસ્ત્ર મસ્તક છે. પરંતુ સહસ્ત્ર હાથો મસ્ત હોવા છતાં બદલ હૃદય તો એક જ છે અને એ પરમાત્મા છે .આ પ્રકારનું  કુટુંબજીવનમાં નિર્માણ થાય ત્યારે કોઈ પાડોશી ભૂખ્યો રહે નહી ,કોઈ વ્યક્તિ વસ્ત્ર વગર નહીં રહે , આશરા વગર નહિ રહે . પોતાનુ સમાજને અર્પણ કરવાથી સમાજ સશક્ત બંને અને વ્યક્તિ પણ.સમાજના જીવનથી વિશ્વ કલ્યાણની ભાવના જે 
"સર્વે ભવન્તુ સુખિન સર્વે સંતુ નિરામયા "
થઈ શકશે મિત્ર અને શત્રુ પણ સમાન ભાવ રહેશે અને ગુણાતીત બની શકાશે.
               આપણા કુટુંબ જીવનમાં ગીતા કહે છે કે વ્યક્તિના ઉત્કર્ષ માટે સંયમ સાદગી કે કરકસર પૂર્વક વસ્તુઓનો જ ઉપયોગ કરવો જોઈએ . કુટુંબના સંસ્કાર જાળવવા માટે  માટે વડીલોથી શરૂઆત કરવી પડશે અને શરીર ઈન્દ્રિય મન ઉપરનો સંયમ જ આપણને આગળ લાવતો હોય છે. 

इन्द्रियाणि पराण्याहुरिन्द्रियेभ्यः परं मनः । 
मनसस्तु परा बुद्धिर्यो बुद्धेः परतस्तु सः ॥

       શરીર પર ઇન્દ્રિયો છે , ઈન્દ્રીયોથી પરે  મન , મનથી પરે બુદ્ધિ છે પરંતુ બુદ્ધિથી પર તો આત્મા છે આ આત્મા શરીર મન બુદ્ધિ  પર કાબુ રહેશે કાયમ રહેશે સમાજનો ઉદ્ધાર કરવા માટે પ્રવૃત થવાશે. વાત દરેક વ્યક્તિએ પોતાના જીવનમાં અપનાવવા જોઈએ આવો વ્યક્તિઓનું સીમિત જીવન વાળું કુટુંબ એ સર્વશ્રેષ્ઠ કુટુંબ અને અન્ય પાડોશીઓને પણ માર્ગદર્શન આપનાર બને છે

      ગીતા તો એક જીવનનો મેન્યુઅલ છે જેવી રીતે કોઈ નવું ગેજેટ્સ ખરીદીએ તેની સાથે મેન્યુઅલ આવે કે વાંચવું જોઈએ તે પ્રમાણે કરવું જોઈએ .આવો આ ગીત માં એક સરસ સુંદર મજાનો શ્લોક કહ્યો છે

            बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते |
            तस्माद्योगाय युज्यस्व योग: कर्मसु कौशलम्
       ભગવાન કહે છે યોગહલકર્મશુ કૌશલમ .  Excellence in  action is yoga . વ્યક્તિ પોતાના કુટુંબ જીવનમાં અને કુટુંબ સમાજ જીવનમાં કર્મયોગ અનુસાર કર્મ કરે બંધનથી મુક્તિ પામે છે અને કર્મમાં કુશળતાની  સ્થિતિ એવી રાખવી છે જેના કારણે કર્મ થાય અને ફળની ચિંતા કર્યા વગર આપણે કામ કરીએ કોઈપણ કામમાં મગ્ન બન્યા અને યોગ્ય નિયમ અનુસાર તેમાં પોતાનું મન પરોવીને કામ કરીએ તો એ યોગ છે .કોઈ પણ કામમાં કુશળતાથી કરો 
      ઉદાહરણ તરીકે ભોજન બનાવતી માં કે બહેન સરસ સુંદર મજાનું ભોજન બનાવે છે તેના માટે યોગ છે .દૂધ ઉકાળતી વખતે ધ્યાન એમાં મન પરોવી રાખવું એ પણ યોગ છે .કોઈ સરસ મજાની ચા બનાવવી કે બુટ પોલીસ કરવો કે  કપડાં ને ઠીક ઇસ્ત્રી કરવા આ બધું એક રીતે જોવા જઈએ તો કુશળતાપૂર્વક કામ યોગ છે .ઘણા કામો જીવનભર કરવા જ પડે છે ન કરીએ તો કષ્ટ થાય ઘણી બધી ઇચ્છા પૂરી કરવા જઇએ તે મન પ્રભાવિત થાય  અને કામ પહેલા જ ફળ ની ચિંતા શરૂ થાય તો કર્મમાં કુશળતા નથી આવતી .તો ફળની ચિંતા કર્યા વગર સુખ મળશે કે દુઃખ મળશે એવી  કલ્પના વગર ત્યારે એમાં મને કામ કરતો થાય છે બધા જ કામો અને નાના હોય કે મોટા બધાને ઠીક રીતે કરવાથી ,ન ફક્ત આપણો વિકાસ થાય છે ,ગુણોનો વિકાસ ,વ્યક્તિનો , પરત્ંતુ સમાજ અને રાષ્ટ્રનો પણ થાય છે . દરેક કામ મા કુશળતા અને ઇશ્વર અર્પણ ભાવ તથા ફળનો સ્વીકાર ઇશ્વર પ્રસાદ રુપે કરવાથી કુટુંબ સુખી થાય છે . 

      આજે કુટુંબજીવનની પદ્ધતિ ની અંદર અનેક બદલાવ આવ્યા છે હા નવા નવા વધતા ગેજેટ્સને કારણે કે જીવન પદ્ધતિના કારણે આપણે આંધળી દોટ મૂકીછે. ગુડ મોર્નિંગ e- tea e-flowers ના મેસેજથી લોકોની સવાર પડે છે .નજીકના સાથે વાતો ન થતી હોય અને દૂરના લોકો વચ્ચે મોબાઇલના મેસેજની ચેટ ની આપ-લે થાય છે .બધાને બેડરૂમ અલગ છે .બધાને જોવાના ટીવી અલગ છે . પસંદગી અલગ છે. દરેકની ચોઈસ ઈચ્છા અલગ હોઈ શકે પરંતુ એના એ પાંજરામાંથી બહાર ન આવી શકાય? આપણે આત્માનો ઉદ્ધાર કરવાથી વ્યક્તિએ નરરાક્ષસ નહિ પરંતુ નરથી નારાયણ બનાવવાની પ્રક્રિયા કે ગીતાનો સંદેશ છે .કુટુંબના દરેક સભ્ય શ્રેષ્ઠ બને એ માટે વ્યક્તિએ થોડું ત્યાગ વૈરાગ્યની ભાવના કેળવવી પડે . થોડા ત્યાગ વૈરાગ્ય અને અભ્યાસથી આ શક્ય છે.પણ કહેવાય એમ કહેવાય છે કે મન તો કેવું છે વાંદરા જેવું છે .સામે ટીવી હોય હાથમાં એનું રિમોટ હોય કે મોબાઈલ ઓકે ગેમ રમતા છોડવાનું મન ન થાય. એપલ કંપની સર્વે કર્યો છે કે દરેક વ્યક્તિ ઓછામાં ઓછો 80 પોતાનો ફોન અન લોક કરે છે અને ૧૭૦૦ વધુ વાર સ્વાઇપ  કરે છે .આવી બધી વસ્તુઓમાંથી મનને દૂર કરી અને પોતાના બુદ્ધિ તરફ હોય તો શું કરવું જોઈએ તો ગીતામાં કહે છે 
       असंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम्‌ । 
       अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते ॥
મને બહુ ચંચળ છે નિગ્રહ કરવો કઠિન છે ઠીક છે પરંતુ અભ્યાસ કર અને વૈરાગ્યથી શક્ય  બને છે .આપણે શું આપણા જીવનમાં અપનાવી શકે ખરા? 
           પરિવાર ત્યારે જ સુખી ,સંપન સર્વશ્રેષ્ઠ અને ઉત્કૃષ્ટ બને છે જ્યારે પરિવારમાં એવી દેવી સંપત્તિ હોય પરંતુ દેવી માટે શું કરવું જોઈએ એમ કહેવાય છે કે દરેક ઘરમાં પંચમહા યજ્ઞ  થવો જોઈએ  દેવ યજ્ઞ, પિતૃ યજ્ઞ, ભૂત યજ્ઞ, મનુષ્ય યજ્ઞ  અને બ્રહ્મ યજ્ઞ. દેવ યણ એટલે કૂળ દેવી-દેવતાઓની પૂજા ,પોતાના કુળદેવતા કે કુળદેવીની પૂજા ધાર્મિક વિધિઓ , પિતૃઋણ અટલે વડીલો વડવાઓની સેવા, ભૂત યજ્ઞ એટલે પશુ પક્ષી વનસ્પતિ પર્યાવરણ ની સેવા રક્ષા.  મનુષ્ય યજ્ઞ એટલ્ એટલે કે આસપાસમાં રહેલા મનુષ્યોની સેવા અને છેલ્લે બ્રહ્મ યજ્ઞ એટલે જ્ઞાન ઉપાર્જન. 
           કુટુબજીવનમા અંતઃકરણની શુદ્ધિ ,યોગમાં દ્રઢ વિશ્વાસ હોવો સાત્વિક દાન વૃતિ,  યજ્ઞ ની પ્રવૃત્તિ ચાલતી હોય ,સ્વાધ્યાય કર્તવ્યપરાયણતા હોય ,કષ્ટ સહન કરવાની વૃત્તિ હોય શરીર મન અને વાણી ની સરળતા હોય ,અહિંસા હોય ,સત્ય ભાષણ ,ક્રોધ ન કરવો ,જ્યાં રાગદ્વેષ રહેતા ન હોય , વિષયોના લાલસા નહી, અચંચળતા. વેરભાવ નો અભાવ હોય છે તે કુટુંબ હંમેશા આગળ આવતું હોય છે અને ગીતાના કહ્યા પ્રમાણે ભગવાન કૃષ્ણનું ધામ બનતું હોય છે. 

      આજે આપણે ગીતાના સંદર્ભ લઈને ઘણી બધી વાતો કુટુંબ જીવન વિશે કરે છે ક્યારેક આપણને એમ થાય કે શું આ બધું શક્ય છે ખરું પરંતુ આ એક વખત મન તાયાર થાય ભગવાન શ્રીકૃષ્ણ જેવા સારથી હોય પરિવારના વડીલો આશીર્વાદ  હોય તો સર્વ શકે છે .પૂજ્ય પાંડુરંગ દાદા જેવા ના મહાપુરુષો ના આશીર્વાદ હોય અને આપણા મનમાં એક દ્રઢ નિર્ધાર થાય તો અવશ્ય થી બનતી હોય છે .એમ કહેવાય છે કે 

यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः।

तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम।।
    ગીતાનો સંદેશ જીવનમાં અપનાવીને પોતાના જીવનની શ્રેષ્ઠતા કુટુંબને શ્રેષ્ઠતા અને આવા શ્રેષ્ઠ ખુશ્બુ વાળા ભારત દ્વારા દુનિયા કે ને સંદેશ બનાવવા માટે આપણે વિશ્વ ગુરુ ના સ્થાને પહોંચી એ તેવી અપેક્ષા માં આવનારી પેઢીને પણ ફાયદો રહે એવી અભ્યર્થના અસ્તુ.
ભારત માતાકી જય
















Monday, October 4, 2021

Mananiya Sheshadriji


     गुजरातमे कच्छ मे 26 जनवरी 2001 को आए भूकंप में कच्छ और आसपासके  इलाकेमे  हुइ जानहानी के समय काम कर रहे संघकार्यकर्ता और हताहत हुए लोगोको मिलनेमे लिए माननीय शेषाद्रीजीका गुजरातमे प्रवास हुआ। इस प्रवासके  दौरान उनका मोरबीमेआना हुआ। यहाँ  कई घर गिर दये थे,कई लोगों की जान भी गईथी और कंइ लोग घायलभी हुए थे। इस समय राहत कार्योंमे लगेकार्यकर्ताओके साथ मीलनालोगोको सांत्वना देना और मार्गदर्शन करना हुआ। इस समय सब कार्यकर्ता को भोजन सब सामान्य पीड़ितलोगोके साथ था। मेरे अस्पताल के पास एक स्कूल के मैदान में भोजन व्यवस्था थी  भूकंप पीड़ितों के लिए जो भोजन तैयार किया गयाथा वह खीचड़ी और आलू की सब्जी थी लेकिन थोड़ी सी शेषाद्रीके परेजीके  कारण उनके लिए अलग चावलदाल और दही था।।सभीलोगोंको बनाइ खिचड़ी  और आलू की सब्जी उन्होने देख ली जिसमें मिर्च और नमक अधिक थाकिन्तु उन्होंने वह खिचड़ी सब्ज़ी भीमाँगी।अधिकारी को भी अन्य लोग क्या खा रहे हैं वह पता होना चाहीए। कितनी सरलता और सबके साथ सुखदुख में रहना औरएकताका भाव बनाना यह संदेश रहा।

      एक बार जामनगर में  जिले तक कार्यकर्ताओं की बैठक और वर्ग हुआ  था ।एक कार्यकर्ता ने  शेषाद्रीजीको सवाल किया किअधिकारी बननेके बाद मुख्य शिक्षक और कार्यवाह जैसा मैदानी कार्य की मजा नहीं आता  उन्होने कहाकी ने कहा कि मुख्य शिक्षक केको लिए गटनायक ,स्वंयसेवक अपने कामका व्याप है लेकिन उपरके अधिकारीके लिए काम का गट बदल जाता है , यह अनुभव हमाराभी है। लेकिन यह कार्य विभाजन हैस्वीकारना पड़ेगा। अपने उदाहरण और विचारसे सबका समाधान करना यह बात देखी गइ।

     शेषाद्रीजी को शांत स्वभाव के गंभीर चेहरे से तो सभी ने देखा है लेकिन गुजरात मे 2001 की संघ शिक्षा ( नवसारी सुपा)वर्ग केसमापन बाद प्रबंधकोके साथ हंसते-हंसते चुटकुले सुनाकर सभी को चौंका दिया  मैं और हसमुखभाइ पटेलको वर्गके समापन समयप्रांत सहकार्यवाह का दायित्व घोषित कीया तो वो बोले भूकंपोंमे ज़्यादा काम करनेका यह परिणाम है 

     माननीय शेषाद्रीजी गुजरातमें भरूच की संघ शिक्षा वर्ग ( इस २०००आयें थे। उन्होंने कहा आज मेरा जन्मदिन है और कल मैंमहाराष्ट्र के एक गाँव जा रहा हूँ। जहां मेरे जन्मदिन पर एक परिवार यज्ञ कर रहा है। कइ साल बाद उनसे मिलना होगा। भोजनके समयवर्ग सर्वाधिकारी ने सोंचा सब शिक्षार्थीओ को यह बताया जाय लेकिन जैसे अधिकारी सुचनाके लिए उठने लगे तो शेषाद्रीजीनेइशारेसे मना कर दिया  दोपहर के भोजन के बाद वो खुद वर्ग के अधिकारी से मिले और कहा कि मैंने आपको दोपहर के भोजन परअपने जन्मदिन की घोषणा करने से रोक दिया क्योंकि आज भोजनमे मिठाइ देने वाले थे और शिक्षार्थीओको लगेगा की जन्मदिन केकारण मिठाइ है।अधिकारी का जन्मदिन  पर मिठाइ होनी चाहीए। उनमेसे  कोइ भविष्यमे अधिकारी बनेंगे को यह सोच बन शक्ति है।छोटी बातों का भी क्या महत्व है अपने व्यवहारसे बताया  वंदन 

—— डो जयंति भाडेसिआ 

( मोरबी- गुजरात)

पश्चिम क्षेत्र संघचालक