Thursday, September 15, 2022

शरीर माध्यम खलु धर्म साधनम्


 शिक्षा संगम - समर्थ भारत ( सुरतदिनांक १३..२२

          गुजरात की सूरत जैसी औद्योगिक और समृद्ध और खाने पीने के लिए पहचाने जाने वाली महानगरी में आज समर्थ भारत ट्रस्टआयोजित शिक्षा संगम में आप सबके बीच उपस्थित होने का मुझे आनंद है 

       स्वतंत्र भारत में अब नई शिक्षा नीति के अंतर्गत शिक्षा जगत में एक सामूहिक मंथन का आयोजन इस संगम में हुआ है ।कुछ पूर्वनिर्धारित प्रवास के कारण में आपके नजदीक नहीं होने से आभी माध्यम से जुड़ रहा हूं।     

      जब हम शिक्षा के बारे में सोचते हैं तब शिक्षा का उद्देश्य क्या है यह जानना जरूरी है ।जो पूर्व और आने वाले सत्र में होगा ही। इसउद्देश्य की पूर्ति के लिए काम करने वाले आचार्य गण , शिक्षा लेने वाले विद्यार्थि गण और उनके पाठ्यक्रम बनाने वाले का महत्व है ।लेकिन अगर पात्र ठीक नहीं होता तो उस में डाली हुई चीजें जो परिणाम देना चाहती है वह नहीं मिल सकी। इसलिए हमारे यहां प्राचीनकाल से गुरुकुल प्रथा से और आगे भी (माननीय धर्मपाल जी अपना पुस्तक ब्यूटीफुल ट्री में बताते हैं कि )पंचकोशी  प्रशिक्षण कीकीबैग कहीं गइ है। इसमें सिद्धांत और व्यवहारिक दोनों चीजें आती है। शारीरिक -शरीर को ठीक रखने की बातें , पात्र को ठीक रखनेके क्रम और उनका अभ्यास व्यवहार में कैसे लेना यह सोचना चाहिए  

       फिर से याद दिलाए के पात्र ठीक नहीं है तो पात्र में डाली हुइ चीज टिकती नहीं , बिगड़ जाती है और जो है उनके गुण धर्मों में बदलहोता है ।और  हम जो चाहते हैं वह नहीं बन सकता ।इसलिए हमारे शास्त्रों में बताया गया है शरीर ठीक तो बाक़ी सबकुछ ठीक  

         शरीर माध्यम खलु धर्म साधनम्

       अंग्रेजी में कहा जाता है  Health is wealth 

शरीर ठीक होना अभ्यास के लिए कितना महत्व का है यह , हमारे स्वतंत्रता आंदोलन थे प्रखर नेता लोकमान्य तिलक अपने अभ्यास केके समय दरमियान कुछ स्वास्थ्य बिगड़ गया तो पढ़ने में 1 साल की छुट्टी ले ली और शरीर ठीक होने जाने के बाद ही उसने पुनः अभ्यासआरंभ किया ।अगर शरीर ठीक नहीं है तो अभ्यास अच्छी तरह से नहीं हो सकता यह बताते हैं। 

        कवि कालिदास साहित्यकार होने के साथ-साथ हो बताते हैं सभी पेशीओका का घोंसला यह शरीर है। उस पर मांस वगैरह लगेहुए हैं ।चमड़े की खाला लगी हुइ है। मांसपेशियों से हलनचलन की सहायता मिलती है और उनका आधार हड्डी है और हड्डी जहां जुड़तीहै वह संधि है ।यह हमारे शरीर की रचना है ।यह रचना हमारे धर्म कार्य का साधन है

       शरीर रूपी साधन  को ठीक रखने के लिए और भगवान ने बनाया हुआ यह यंत्र लंबे समय तक चलता रहा है इसलिए शिक्षाव्यवस्था में यह भी चीज बताने जरूरी है जैसे कि हमारा भोजन स्वस्थ और समतोल होशरीर के लिए जरूरी व्यायाम हो ,योग्य मात्रा मेंविश्राम और नींद की भी आवश्यकता है ।पूरे समय पर हमारे श्वसन की गति कैसी हो इसका भी महत्व है ।कैसे चलना ,कैसे बैठना ,कैसेखड़े रहना ,यह सब बहुत महत्व की बातें है ।जो आज की चलती हुई ,दौड़ती हुई ,हमारी जिंदगी में हम बेसिक बातें भूल जाते हैं ।औरशिक्षा लेने में शरीर पर से ध्यान चला जाता है।कई बार तो शिक्षा के हमारे विद्यालयों में छोटी-छोटी बातों की ओर ध्यान किसी का नहींजाता ,  आचार्य का जाता है ना हमारे विद्यालय के व्यवस्थापक का और पालक का  

          बताया जाता है कि हमारे शरीर के लिए व्यायाम भी होना चाहिए ।कम से कम आधा घंटा पसीना वह ऐसा काम करना चाहिए ।जब ऐसी बात बताते हैं तो ना हमारे विद्यार्थी के माता-पिता तैयार होते हैं और ना शिक्षा संस्थान ।अभ्यास में इसके लिए  समय रहता हैऔर  पसीना बहाने की बात आती है ।तो मुझे याद आता है गुजराती के हास्य लेखक ज्योतिद्र दवे जो  दुबले पतले  थेउन्हे किसी नेकहा शरीर ठीक करना है तो व्यायाम करना चाहिए ,उन्होंने पूछा कितना चाहिएबताने वाले ने कहा जब तक पसीना  जाए तब तक ।वह 1 दिन सुबह में उठकर व्यायाम शाला में गए वहां व्यायाम करते हुए अन्य लोगों को देखकर खड़े-खड़े उनको पसीना  गया ।वापस गए उन्होंने हंसते हुए कहा व्यायाम करने वाले को देखकर ही मुझे पसीना आता है मुझे कुछ व्यायाम की जरूरत नहीं है।       

        इसलिए आज नई शिक्षा नीति में शरीर रूपी माध्यम को ठीक करने के लिए शारीरिक प्रशिक्षण का अभ्यासक्रम और उनको पढ़ानेवाले और उनके पाठ्यक्रम के बारे में चिंता करनी चाहिए।विश्व आरोग्य संस्था ने भी बताया है कि स्वस्थ शरीर की व्याख्या में शारीरिक,मानसिक ,बौद्धिक ,सामाजिक ,सांस्कृतिक और आध्यात्मिक  स्वास्थ्की बात है  इसका अभाव ही रोग है  Health is a state of complete physical mental and social wellbeing  and not nearly absence of disease or infarmity

       शारीरिक शिक्षा के अभ्यासक्रम की शुरुआत अपने परिवार में ही होती है  परिवार के जीवन पद्धति ,उनकी दिनचर्या ,दिन में कामकरने के क्रम ,माता पिता और परिवार के लोगों द्वारा शिक्षा , समाज , अडोश पड़ोस और शिक्षा संस्थान ना महत्वका सहयोग आवश्यकहै  

आगे चलकर जब बच्चा पढ़ाई के लिए शिक्षा संस्थान में जाता है तब शिक्षा संस्थानअभ्यासक्रम ,आचार्य ,वातावरण ,शिक्षा संकुल केव्यवस्थापक ,सरकार वगैरे का रोल आता है ।इसलिए स्वास्थ्य शिक्षा के अभ्यासक्रम के लिए  सिर्फ सरकार शिक्षा संस्थान , लेकिनपरिवार का भी महत्व है ।हमारे यहां ऐसा बताया जाता था की शरीर में रोग आने से पहले ही उनको  रोकना  चाहिए ।इसलिए एककहानी है

 ।एक गांव में राजा के पास तीन वैद्य आए ।तीनों वैद्य की श्रेष्ठता क्या है ,यह देखने के लिए राजा ने उनसे अपनी योग्यता पूछी। , एकवैद्य ने कहा मैं किसी भी मरीज को रोग पूर्ण रुपसे निखरता है तब मै दवाए दे सकता हुदूसरे वैद्यने बताया कि मैं जब मरीज को रोग  कीशुरू होता है तब ही उनको ठीक करने का काम करता हु।लेकिन तीसरा वैद्य ने कहा मैं मेरे सामाजिक विस्तार में मरीज को रोग आने सेपहले ही उनको कैसे रोके इसके लिए काम करता हूं ।वह तीसरा वैद् सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। 

        Prevention is better than cure . हमारे प्राचीन ऋषि-मुनियों ने बताया है कि हमारी शिक्षा योग आधारित होनी चाहिए ।ऋषि पतंजलि ने इसके लिए अष्टांग योग की रचना की और महत्व बताया है ।अष्टांग योग में यम ,नियम ,आसन ,प्राणायामप्रत्याहार,धारणा ,ध्यान और समाधि का महत्व बताया गया है  इसके अंतर्गत क्या-क्या चीजें आती है जैसे यम नियम मे और भी बातें जाननीहै। 

पुनरुत्थान ट्रस्ट के इंदुमतीबेन काटधरे  बार-बार बताती है कि अगर अभ्यासक्रम में योग शिक्षा का महत्व समझ लिया तो और कुछसमझने की जरूरत नहीं है ।हमारे यहां लोग मानने लगे हैं कि सिर्फ योगासन ही योग है। यह ठीक नहीं है उसके साथ और काफी कुछचीजें है ।वह समझ कर अभ्यासक्रम में उनका व्यवहारिक उपयोग हुआ तो विद्यार्थी एक अभ्यासमे ही नहीं आने वाले अपने जीवनमे भीशुद्ध ,स्वस्थ और लंबी उम्र वाला बन सकता है। 

        आधारित शिक्षा में सिर्फ शारीरिक बातें ही नहीं है।

इसमें योग और शारीरिक के साथ नियम पालन ,चित्त शुद्धि ,स्वच्छता ,सेवा कार्यक्रम कार्य जैसी बातें भी आती है ।जैसे बच्चों द्वारा पंछीको दाना खिलाना ,यह सिर्फ सेवा नहीं है ।यह आनंद है ।ऐसे आनंद की क्रिया भी एक सहज योग है जो शरीर को स्वस्थ बनाती है शाला परिसर में श्रम कार्य का भी महत्व रहना चाहिए ।अपने कक्ष की सफाई करना ,पानी के साधन को ठीक रखना ,अपने कक्ष की बेंचस्वयं ही ठीक रखना ,ऐसे श्रम कार्य करने में बच्चों के आनंद के साथ श्रम करनेकी आदत होती है  अपने अंदर स्पर्धा का भाव जगता है।वैसे क्लास रूम में बैठे बैठे कुछ  कुछ करते रहनेकी आदत डालनी चाहीए।  इससे पढ़ने के समय नींद कम आती और शरीर स्वस्थरहता है।

     अपने शिक्षा परिसर में अभ्यास शुरू होने से पहले  का उच्चारण करना ना बहुत महत्व की बात है ।जिससे वातावरण  चार्ज होजाता है।मन भी स्वस्थ बनता है ।एकाग्रता की एक आदत बनती है। है यह सिर्फ  शरीर को मन को भी बलवान बनाती हैं ।कैसेऑपरेशन के पहले एनेस्थीसिया। योग है वह रोग के लिए नहीं है ।हम कभी तलवार से भिंडी की सब्जी नहीं काटते ,लेकिन शरीर कोस्वस्थ रखना ,रोगों को दूर रखने के लिए ही योग जीवन पद्धति में आना चाहिए ।यह हमारे अभ्यासक्रम में दिखाना सिखाना और उपयोगमें लाना चाहिए। 

तस्य वाचकप्रणवा

         हमारी शिक्षा पद्धति में

श्रम प्रधान कार्य का महत्व बढ़ाना पड़ेगा।

सिर्फ फिजिकल एजुकेशन नहींउनका तास सिर्फ काफी नहीं हैपरिसर में हर परिश्रम  के काम में आचार्य और विद्यार्थी जुड़े यहआवश्यक है, परिसर की सफाईपानी का इंतजामतास के साथ जुड़े छोटे बड़े श्रम काम में जुड़ने की आदत शरीर को भी ठीक रखतीहै और अपनापन का भाव जगता है।

      इससे घर में भी आदत हो जाति की मेरा काम मैं ख़ुद करुंगा।ट्री प्लांटेशनपानी पिलाना , छोट बड़े व्यवसायीक काम भी शिखाएजाएकभी समय समय पर ऐसे काम करने वाले की जगह मुलाकात करके स्वयं दिखाना भी जरूरी हैजैसे खेत में काम करते किशानमजदूर वि .

       शिक्षा के साथ NCC, NSS, scout  व्यायाम शाला वि जगा हमारे विद्यार्थी जुड़े यह व्यवस्था और मार्ग दर्शन करना पड़ेगाफर्स्ट एड के काम भी सिखाए जाए। 

       अभ्यक्रम में खेलो का महत्व है। खेल के विविध प्रकार सिखाना , स्वदेशी खेलो का महत्व ज्यादा होस्थानिक उपलब्धियों से खेलबनाना बताया जाए ।स्वदेशी खेल में कम साधनों में खेले जाने वाले खेल होनी चाहिए ।विदेश के प्रति ममता बढ़ाता ठीक नही।इससे दूररहने का प्रयत्न करना चाहिए ।खेलों में शरीर का तो स्वास्थ्य ठीक रखने में मदद। रहती है लेकिन उनके साथ अन्य उपलब्धियां भी है-जैसे हार जीत में समभाव रहना ,टीमस्पिरिट बनाते रहना ,प्रमाणिकता खेल में कैसे रहे ,वह सीखना ,व्यक्तिगत और सामूहिक दोनोंप्रकार की  खेल होने चाहिए ।विविध प्रकार के शारीरिक प्रदर्शन का भी महत्व है ।अपने विविध उत्सव में उनका प्रदर्शन होना ।एकसामूहिक मनोभाव बनाने के लिए योगासन , समता संचलन हो। यह सभी प्रोत्साहन स्कूलमें भी हो और साथ-साथ गाइडिंग प्रिंसभीकार्यक्रमों में शिक्षा के मुख्य अध्यापक ,आचार्य अभिभावक ,माता पिता सबका एक स्थान है ।सब को सम्मिलित होना बहुत महत्व कीबात है।

      शरीर रूपी हमारा माध्यम कैसा है उनका बार-बार परीक्षण करते रहना ।मूल्यांकन करते रहना उसके अनुसार सुधार करना यह भीहमारी शिक्षा नीति में हो। शारीरिक अभ्यास क्रम के बारे में बताया जाना चाहिए ।स्वास्थ्य के जो मानक है जैसे वजन ,ऊचाइ,विविधआरोग्य परीक्षण हो ,स्वास्थ्य केंद्रों की सलाह हो ,रसिकरण का शेड्यूल हो ,आयन और विटामिनों की कमी और उनकी पूर्ति हो ।यहसभी भी शरीर रूपी हमारा माध्यम ठीक रखने के लिए ही बताया गया है ।अपने अभ्यासक्रम के साथ साथ ऐसा उनके विविध कोशिश मेंतो होना चाहिए। लेकिन साथ-साथ स्कूल कैलेंडर में भी इनके लिए जगह चाहिए।

           स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन रहता है  शरीर की स्वास्थ्य के लिए बाहरी स्वच्छता का भी इतना महत्व है। स्नान मे ठंडा पानी औरपीने में गर्म पानी हमारा पुराना आयुर्वेद का सिद्धांत है  हाथ मुंह धोना ,बाहर से आने के बाद हाथ पैर धोनेकी  की आदत बनाना ।यहसब कुछ कोरोनावायरस ने सिखा दिया था समयांतर पर नाखून काटना  क्या खाना ,कब खाना ,कैसे खाना खानाखाना खाने मेंकैलोरी का क्या महत्व है और आर्टिफिशियल चीजों से दूर रहना (कॉम्प्लान बोस का अभ्यास क्रम में बताया जाये   माता पिता केसाथ हुई बैठक में विषयों में बताया जाता है  विद्यालयों में विद्यार्थी अपने साथ में नाश्ता है उसमें क्या लेना चाहिए सूचना दी जाती है , जो बाजार में मिलता है वह और टीवी के सामने बैठकर या मोबाइल के साथ काम करते करते खाना पीना स्वास्थ्य के लिए अच्छा नही है।लेकिन उनमें चलते विचारों से प्रति हमारे भोजन का पाचन भी ठीक नहीं होता और अनेक नए रोगो को यह निमंत्रण देता है

      शरीर रूपी माध्यम को ठीक करने के लिए जीवन में एकाग्रता का महत्व है ।ध्यान धारणा समाधि यह उनके अंतिम स्वरूप है ।छोटेबड़े प्रयत्नों से अगर ध्यान सिखाया जाता है तो मानसिक तनाव भी कम होता है ।नींद भी अच्छीआती है।हम बड़े-बड़े अपने घर बनाते हैंऔर उनमे खिड़कियां रहती है लेकिन के ऊपर परदे डाले जाते हैं और ऐसी की हवा चलती है ।ऐसे चलेंगे तो नींद भी अच्छी कैसे सकती ? स्वास्थ्य पूर्ण वातावरण भी महत्व है। 

       इतना ही नहीं अभ्यास क्रम में बताई जाती वंदना और प्रार्थना यह सिर्फ भगवान के नाम स्मरण और अध्यात्मिक धार्मिक तैयार नहींहै ।उनसे मन की एकाग्रता बढ़ती है। स्वामी विवेकानंद ने कहा था अगर मुझे दूसरा जन्म मिले तो फिर से मैं एकाग्र होकर और ज्यादापढ़ना चाहता हूं 

        सा विद्या या विमुकतये। हमारी राष्ट्रीय शिक्षा हमारे दर्शन के अनुसार होना यह हमने आवश्यक माना है ।व्यक्तिगत विकास औरसामाजिक जीवन के उद्देश्य के लिए हमारी शिक्षा पद्धति होनी चाहिए ।बार-बार बताया जाता है कि हमारी शिक्षा की अवधारणा योगआधारित है ।जीवन में भी पंचमुखी ,व्यवसाय ,मानसिक आध्यात्मिकसामाजिक ऐसी सभी विषयों की शिक्षा हो ।साथ-साथज्ञानेन्द्रिय  और कर्मेंद्रिय का भी संतुलन रहना चाहिए ।यह नहीं रहा तो संपूर्ण विकास नहीं कर सकते 

      हमारी प्राणशक्तिइच्छाशक्ति और बौद्धिक शक्ति हमारे संपूर्ण आत्मा को लेकर शरीर को भी ठीक बनाने में मदद करती है ।जीवनका सुख सिर्फ लेने में नहीं है ,देने में है ।यह शरीर के माध्यम से अच्छा है बताया जा सकता है ।हमारे राष्ट्र शास्त्रों के चिंतन में यही बातबार-बार बताई जाती है ।हमारे जीवन मूल्योमे व्यक्तिगत ,आर्थिक ,सामाजिक ,बौद्धिक और अध्यात्मिक ,आध्यात्मिक और अन्य बातेंशरीर के साथ साथ चलती है ।यह सभी मूल्यों के विकास के लिए स्वस्थ शरीर की आवश्यकता है ।सिर्फ शरीर की सुंदरता नहीं ,अंदरइन्हीं मूल्यों से भी बाहर की सुंदरता बढ़ती है ।क्योंकि इनसे उनको आनंद मिलता है।

      स्वामी विवेकानंद कहते हैं अनंत शक्ति धर्म है ।बल पुण्य है ।दुर्बलता पाप है ।पाप और अनीष्ट का शब्द दुर्बलता है  वह बताते थेकि हमारी मांसपेशी लोहे  कि होनी चाहिए और स्नायु हमारे पेलाद के होना चाहिए ।अगर हमारा शरीर ठीक नहीं रहा तो हम हमारा ज्ञानका प्रचार प्रसार नहीं कर सकते। अगर गीता का अभ्यास करना है तो फुटबॉल के मैदान में जाना चाहिए और अपने पैर पर खड़ा होने केबाद ही हम उपनिषद समज सकते है  

     हमारे शरीर की शिक्षा शरीर तक सीमित नहीं है "अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या "

अष्ट चक्रों वाली और नव द्वार वाला यह शरीर अयोध्या जैसा पवित्र है। भारतीय शिक्षा क्रम में जो  जरुरी है उनको ठीक रखना चाहिए ।नई शिक्षा नीति तो आएगी लेकिन शिक्षा नीति के अम्लीकरण  करने वाले लोग के मन भी तैयार रहना चाहिए ।यह तो सब नया है यहठीक नहीं है वह पुराना था ,वह ठीक है वगैरह वगैरह बहाने बनाकर नई चीजों का स्वागत  करने का स्वभाव ठीक नहीं है ।शिक्षा में जैसासाहित्य ,समाज ,पर्यावरण और स्वास्थ्य ,विज्ञान ,गणित का महत्व ठीक रखने के लिए शारीरिक शिक्षण का अभ्यासक्रम भी काफीमहत्व का है। हम अपने समाज और राष्ट्र को स्वस्थ रखना चाहते है लेकिन आने वाले समय में दुनिया का भी स्वास्थ्य ठीक रखनेका  रास्ता बताना चाहते हैं ।यह रास्ते का चिंतन नई शिक्षा नीति मे है  

हमारे विश्व कल्याण के मार्ग पर जाने के लिए , हमारा कर्तव्य बजानेके लिए शरीर रुपी माध्यम के ठीक रखकर हमारा धर्म पूर्ण करे। 


Saturday, August 20, 2022

આઝાદીના અમૃતમહોત્સવ પ્રસંગે યુવાનો પાસે અપેક્ષા

ઘટમાં ઘોડા થનગને યૌવન વીંઝે પાંખ
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[ ] આઝાદીના અમૃત મહોત્સવની ઉજવણી
મળ્યા ને 75 વર્ષ પૂર્ણ થઈ રહ્યા છે આઝાદી મેળવવામાં પણ યુવાનોની વિશેષ ભૂમિકા હતી આઝાદ ભારત અને સ્વતંત્રતામાં સ્વ તરફ લઈ જવાની યાત્રામાં પણ યુવાનોનું એક મહત્વનો ફાળો છે એ વિષય ઉપર આજે આપણે વિચાર કરીશું
[ ] યુવા એ કોઈ ઉંમરનો વિષય નથી મોટી ઉંમરની વ્યક્તિ પણ મનથી યુવાન હોઈ શકે છે યુવા હોવું એ ગુણ સંપદા છે રાષ્ટ્ર નિર્માણમાં યોગ્ય મનોવૃત્તિ એ યુવાવસ્થા છે
[ ] ઉદાહરણ અમેરિકામાં જાદુના ખેલમાં સ્વામી વિવેકાનંદ જાદુગરને જાદુઈ અસરમાં ન આવ્યા ઘડિયાળમાં સાચો સમય શું છે એ કહ્યું
[ ] સ્વામી વિવેકાનંદ યુવાનોના આદર્શ છે તેમનો જન્મદિવસ 12 જાન્યુઆરી યુવા દે સ્વામી વિવેકાનંદ યુવાનો માટે રોલ મોડલ છે
[ ] શા માટે આપણે યુવાનોને જ રાષ્ટ્રના પરિપેક્ષમાં યાદ કરવા જોઈએ કારણ કે આ જ સાચું ધન છે તે રાષ્ટ્રને યોગ્ય દિશામાં લઈ જઈ શકે
[ ] I have a faith younger generation
[ ] I have a faith in modern generation
[ ] my workers will come out from them and they will work and roar like a lions
[ ] I want a man with capital M
[ ] give me the hundred Nachiketa
[ ] Important people who
[ ] Swami Vivekananda 39
[ ] Shankaracharya 33
[ ] Shivaji Maharaj 50
[ ] Swami ramtirth Ramdev 33
[ ] Dr Hedgewar 51
In political area in
America Barack Obama at 44
England David Cameron at 44
France in Imanyuel 39
New Zealand jayshing adon 35
Saudi Mohammad bin Salman 32

ભારતના ઉદ્યોગપતિઓ
વી એસ એસ મની justdial
સચિન બંસલ flipkart
રોહિત બન્સલ snapdeal
લક્ષ્મી જેતપુરી ફેશન ઇન્ડિયા
એડું સ્પોર્ટ સૌમિલ મજમુદાર
શેરબજારમાં આશિષ ચૌહાણ
ગ્રામ વિકાસમાં નીલમ પટેલ

Ndtv ના કાર્યક્રમમાં પેપ્સી કોલા ની સીઈઓ ઇન્દ્રાણી આપેલી વાતોને યાદ રાખે તેમને કહ્યું હતું કે સ્ટુડન્ટ એન્ડ હાર્ટ ઈન યોર વર્ક નેવર યુ આર યુ આર રુટ્સ

નરેન્દ્ર મોદીએ મનની વાતમાં કહ્યું હતું 21મી સદીની અંદર આપણે ઘણા નવા વોટરસ અને ઉમેર્યા છે એનાથી ન્યુ ઈન્ડિયાની કલ્પના તેમના ઉમંગ ઉત્સાહ અને ઊર્જાના કારણે આપણે સાકાર કરી શકશો.
વિલિયમ જેમ્સ કહે છે એસ.એમિઝમ લીડ્સ ટુ બિઝનેસ એન્ડ ઓપ્ટિમિઝમ લીટ્સ ટુ પાવર

રાષ્ટ્રના પરિપક્ષમાં કામ કરવા માટે આપણે થોડી ગુણવત્તા ફેરવી પડશે
એક લક્ષણ નિર્ધાર કરવું પડશે
આત્મ વિશ્વાસ કેળવવો પડશે આઈ કેન ડુ
સમર્પણની ભાવના
સંગઠન વખતે કામ કરવાની ટેવ
એકાગ્રતા _ચારિત્ર નિર્માણ _અને શરીરની ક્ષમતા

કૃતિ શીલ દેશભક્તિ અને રાષ્ટ્રના પરિપક્ષમાં થોડા ઉદાહરણ
[ ] કોંગ્રેસના અધિવેશનમાં અડધી કાઠીએ અટકી ગયેલ રાષ્ટ્ર ધ્વજને ઉતાવનાર સ્વયં સેવક
[ ] ફક્ત વિચાર નહીં કૃતિનું મહત્વ દરિયાકાંઠે મોજાઓ બંધ થવાની રાહ જોઈ રહેલા યુવાન દરિયામાં નાઈ ન શકે તાનાજી માલસૂરે અને બાજી પ્રભૂ માટે ને યાદ કરીએ
[ ] રાષ્ટ્રનો પ્રથમ વિચાર બીજા વિશ્વયુદ્ધ વખતે રિસનની દુકાને લાગેલી લાઈન અને ચર્ચિલનો સવાલ ઇઝરાયેલમાં પત્ની પતિને ચીઠી મૂકીને સીમા પર કામ કરવા જાય જાપાનમાં યુવાન કહે છે મારા પૈસે ટિકિટ ખરીદી અને શો જોઈશ
[ ] શિક્ષણ સહાયતા માટે નીકળી પડો પુનાનું ઉદાહરણ સંઘની આઈટી મિલનના યુવાનો ફરતી પ્રયોગશાળાનો પ્રકલ્પ
[ ] આપણી વસ્તી ઘણી છે પરંતુ સંસ્કાર જરૂરી કલકત્તામાં જર્મન યુવતી અને કચરાના ઢગલા ની વાત
[ ] અમેરિકામાં એક નાની છોકરીની વાત પુસ્તક વાંચ્યા વગર હું કેમ લિસ્ટ બનાવી શકો how can I do? It's my honours
[ ] યુવા ધન્ય યોગ્ય રસ્તે વાડીએ જેસીકા લાલ ની ઘટના અને યુનિવર્સિટી ની પરીક્ષામાં થતી ચોરી
[ ] સ્વામી વિવેકાનંદે કહ્યું હતું 50 વર્ષ માટે બધાને ભૂલી જાઓ ફક્ત ભારત માતા માટે કામ કરો
[ ] ગીતાને સમજવા માટે ફૂટબોલના મેદાનમાં જવું પડશે તમારા સ્નાયુઓ ઓલાદના અને જ્ઞાનતંતુઓ લોખંડના બનાવવા પડશે
[ ] બેલુર મઠ ના પૈસા લેનાર રોગ માટે વાપરવા એ સંથાલ કારીગરોને મીઠાઈ પોતાના હાથે વહેંચવી પૈસાનું યોગ્ય ઉપયોગ અને સામાજિક સમર્થન ઉદાહરણ જીવનમાં આપવું પડશે
[ ] મળવા આવેલા પત્રકાર સાથે અધ્યાત્મની ચર્ચા ના કરતા સમાજની ચર્ચા કરી અને કહ્યું કે જ્યાં સુધી એ કૂતરો પણ ભૂખ્યો હોય ત્યાં સુધી અધ્યાત્મની ચર્ચા કોઈ મહત્વ નથી આપણા આદર્શ હનુમાનજી અને મહાવીર સ્વામી હોવા જોઈએ
[ ] નાગાલેન્ડના કોઈમાં શહેરમાં રહેલ બાળકો માટેનો સંદેશ યાદ રાખે વેન યુગો બેક હોમ ટેલર ચિલ્ડ્રન ધેટ વી હેવ લેફ્ટ અવર લાઈવ ફોર યોર ફ્યુચર
[ ] સિદ્ધિ તેને જઈને ભરે છે પરસેવે નાઈ
[ ] હનુમાનજી નો આદર્શ રાખીએ જો નહીં રામ કા વો નહીં કામકા
[ ] પુલવામાની ઘટનામાં કર્મનઘાસીને હું તને ઘાટ ઉતારનાર જનરલ વિભૂતિ ડોંડિયાર શહીદ થયા પછી તેમની પત્ની નિકિતા નો સંદેશ તમે મને પ્રેમ કરતા હતા પરંતુ મારા કરતાં દેશને વધારે પ્રેમ કરતા હતા ડોક્ટર શરદ ઠાકર ની હોસ્પિટલમાં એક યુવાન લશ્કરી જવાના પત્ની પુત્ર જન્મ થયા પછી સમાચાર મળે છે તે પતિનું મૃત્યુ થયું છે ત્યારે કહે છે મેં અશોક ગુમાવે છે દેશે કંઈ ગુમાવ્યું નથી મારા પતિ જવાન મુક્તા ગયા છે
[ ] Latest revisit Swami Vivekananda
[ ] he was a youth in fullness
[ ] never take as it is always ask the question never get satisfied
[ ] filled the pay accepted challenges
[ ] read the books like pride of India and dharmpal Rajiv Malhotra breaking India
[ ] never forget your society nation
[ ] arise away and don't stop till you get your aim full field in domicile will to work for rashtra ask for ideal in all and never ask what others will can do always as what can I do
[ ] સામાજિક સમરસતા અખંડ ભારતના માટે પૂરો કર ભારતમાં કામ જરૂરી છે ગરીબ ગ્રહ દેવો ભવ મૂર્ખ દેવો ભવ દર્દી દેવો ભવ

Friday, August 19, 2022

ભગવાન શ્રી કૃષ્ણજન્મોત્સવ



ભગવાન શ્રીકૃષ્ણનો જન્મ
શ્રાવણ વદ આઠમનો દિવસ
મુશળધાર વરસાદ ચાલી રહ્યો છે
વાદળોના ગડગડાટ અને વીજળીના કડાકા થઈ રહ્યા છે
નદી નાળા છલકાઈ રહ્યા છે યમુના બે કાંઠે વહી રહી છે
દૈત્ય કંસના રાજ્યમાં આકાર વ્યાપેલો છે
સગા બેન બનેવીને જેલમાં ફરીને અત્યાચારી રાજ ચાલી રહ્યું છે
રાત્રે બાર વાગ્યે રોહિણી નક્ષત્રમાં મથુરાની જેલમાં ભગવાન કૃષ્ણનો અવતાર થાય છે
સર્વ સમાજ સૃષ્ટિ થી ભરેલા પૃથ્વીનો ભાર ઉતારવા ભગવાનનો આઠમો અવતાર એટલે શ્રીકૃષ્ણનો જન્મ 


यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत ।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्

परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे 


જીવનમાં જ્યારે અંધારું છવાયું હતું
લોકો પોકારી રહ્યા હતા
દુઃખના વાદળો ચારે તરફ છવાયેલા હતા
પ્રજા આસુરી રાજથી ટ્રસ્ટ થઈ ગઈ હતી
ઋષિ મુનિ સંત મહંત પ્રજા અને દેવના કલ્યાણ માટે તેથી રાક્ષસી તત્વના નાશ માટે ભગવાન કૃષ્ણનો જન્મ આજે એના પવિત્ર દિવસે થાય છે 

ભગવાન શ્રીકૃષ્ણ એટલે 
પીળા પીતાંબર ધારી 
મોરપીછધારી
બાંસુરી વાદન કરતા
ગૌ માતાની સાથે જેનો નિવાસ છે 
સુદર્શન ચક્રધારી 
જગતગુરુ શ્રીકૃષ્ણ 

અસુરોના ના સંઘારક વૃતાશૃંગ અધાતુર બકાસવું પૂતના અને તાલીમ વર્ગ અને નાથનાર 

શ્રી કૃષ્ણ એટલે 
દ્રૌપદીના ચીરપુરના 
અર્જુનના સારથી 
યુદ્ધ મધ્યે ગીતાનો ઉપદેશ આપનાર 
સાચા ધર્મની વ્યાખ્યા કરનાર
ધર્મ રક્ષક 
પોતાના ભક્તની પ્રતિજ્ઞા રાખવા આજે પોતાની પ્રતિજ્ઞા તોડનાર
સમાજ રક્ષા માટે રણછોડ જેવું બિરુદ પણ સ્વીકારનાર 

શ્રી કૃષ્ણ એટલે બહુમુખી બહુ પુણ્ય બહુ સ્વરૂપે
સામાજિક આધ્યાત્મિક નૈતિક ધાર્મિક અને રાજનૈતિક યોગ્ય દ્રષ્ટિ કોણના દાતા
પૂર્ણ પુરુષોત્તમ
પૂજનીયા મોરારીબાપુ ના શબ્દોમાં શ્રીકૃષ્ણ એટલે 
આદર્શ પુરુષ 
આદર પુરૂષ 
આરધ્યા પુરૂષ 
આદ્ય પુરુષ અને 
આનંદપુરુષ 

શ્રી કૃષ્ણ એટલે આદર્શ પ્રબંધક રાજસુય યજ્ઞમાં એકઠા પત્રવડા પણ ઉપાડ્યા
શ્રી કૃષ્ણ એટલે સામાજીક સમરસતાના આમી ગોપાલ વનવાસી પશુપાલક મથુરા ગોકળ અને દ્વારકાની પ્રજાની એક કરી અને સામ્રાજ્ય સ્થાપનાર
શ્રી કૃષ્ણ એટલે ધર્મની યોગ્ય રક્ષા કરનાર પાંડવોની સાથે રહ્યા કારણકે પાંડવોના પક્ષે ધર્મ હતો
નીતિ નિયમોનું યોગ્ય વ્યવહારિક સ્વરૂપ નક્કી કરનાર ધર્મથી વિરુદ્ધ ગયેલા કર્ણને પણ મહાન દાની હોવા છતાં યુદ્ધમાં યોગ્ય જવાબ
માં જ્યારે સંસ્કારોનું શરણ થાય તો કુટુંબને પણ યોગ્ય સજા આપનાર શ્રીકૃષ્ણના સ્વર્ગા ગમન પણ સમયે યાદવસ્થળી નો વિષય 

આજના સંદર્ભમાં શ્રીકૃષ્ણને યાદ કરીએ સુરક્ષા સેવા અને સંસ્કાર સમગ્ર ગ્રામીણ વિકાસ ગૌ સંવર્ધન અને સામાજિક સમસથા અને કુટુંબ પ્રબોધન 

આજે પણ અનેક રાક્ષસો જેવી શક્તિને હેરાન કરી રહ્યા છે જેવા કે આતંકવાદ સીમા ભારતી કુશળખોરી જાતિવાદ આશાવાદ પ્રદેશ તા અલગતા ભેદભાવ અસ્પૃશ્યતા ચારિત્ર નું શરણ ભ્રષ્ટાચાર વિદેશી સંસ્કૃતિનું આક્રમણ અને તૂટતા પરિવારો
આવા સમય આપણે સૌ કૃષ્ણના મિત્ર બનીએ ગોવાળિયા બની સહયોગી બની પાંડવો બનીએ યાદવસેનાના યોગ્ય સૈનિકો બનીએ અને ફરીથી શ્રીકૃષ્ણની ગોકુળભૂમિ જવું ભારતનો નિર્માણ કરીએ ભારત અને વિશ્વભરના સ્થાને પહોંચાડીએ દૂધ દહીં માખણ મિસરી અને ઘીની રેલમછેલ થાય આર્થિક સમૃદ્ધિ થાય આપણે આત્મ નિર્બળ બને અને શ્રીકૃષ્ણના રસ્તે કાર્ય કરવા માટેની પ્રેરણા લઈએ આજની શોભા યાત્રાનો આ જ સાચો સંદેશ આવા મહાવીર પૂર્ણ પુરુષોત્તમ અવતારી પુરુષ કૃષ્ણ ભગવાનને વંદન કૃષ્ણ કનૈયા લાલ કી જય