Wednesday, September 21, 2022

सेवाकी अवधारणा




 सेवाकी अवधारणा

 

 त्वहं कामये राज्यं  स्वर्गं नापुनर्भवम्कामये दुःखताप्तानांप्राणिनामार्तिनाशनम्

मंत्र के साथ काम करने वाले हम सबके लिए

सेवा है यज्ञ कुंड समिधा सम हम जले

      सेवा परमो धर्म 

हिंदू संस्कृति  ेवा द्वारा अपना कर्तव्य निभाना के रास्ता एक धर्म बतायाहै सेवा द्वारा समाजराष्ट्र और विश्व का उत्थान हो सकता है स्व से ऊपरउठनेका क्रम और स्व से परमेश्वर की ओर गति ही समर्पण है और यही सेवाहै

     सेवा के लिए सिर्फ सेवा नही होनी चाहीए।अपने आत्माकी उध्धार औरपुण्य अर्ज करनेके लिए सेवा नही   समाज के साथ अंगांगीभाव सेकरने वाला कार्य ही सेवा है सेवा से सामाजिक समरसता की और जानायही हमारा उद्देश्य है  कार्य पद्धतिकार्य संस्कृति ,प्रयोग ,परिणाम सबहमारे ध्येयकी ओर ले जाने वाले हो

      स्वामी विवेकानंद ने कहा है “दरिद्र नारायण भव “रोगी नारायण भव

      सेवा यानी सर्विस-नौकरी नहीं सेवानिवृत्ति शब्द भी ठीक नही  कोइसेवामे से निवृत्त नही हो सकत , नौकरीसे होता है।राजनितीमे नेता गणकहते हैमुझे सेवा करने का मौका दीजिए “ सता भी सेवा नहीं है।शक्तिकिर्ति पाना भी सेवा नहीं है मतांतर-धर्मांतरण  के लिए करनेवाले काम  सेवानहीं है।सेवा कया नहीं है ,यह जान लिया तो सेवा  क्या है वह मालूम होजाएगा सेवा यानी धर्म  त्येनत्यकतेन भूजिंता सेवा मानसिकता हो

 

     सेवा के उदाहरण देखेंगे स्वामी विवेकानंद कोलकतामे प्लेग के समयभगिनी निवेदिता और अपने सभी शिष्यको काममे लगाया और बेलूर मठ केलिए एकत्रित सब पैसे उनमें खर्च कर दिया उन्होंने खुद ने भी वैद्यनाथधाम केपास नदी किनारे सोये हु  ैज़ा के मरिजकी अपने यजमानके घर लेजाकर उनकी सेवा की।डॉक्टर हेडगेवार ने भी कलकत्ता में बाढ में औरगंगासागर कोलेरा के समय सेवा की  पू गुरुजी कहते थे “ There is joy in giving” . भविष्य में सेवित जन सेवा करने वाले बनने चाहिए उदकात्रेजी द्वारा रकतपित सेवा)सेवा शासन आधारित ही  रहे  दिनदयालजीकहते थे अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए डॉ अशोक कुकडेजी का प्रयोग-लातूर विवेकानंद होस्पीटल यह उदाहरण है जहां कम स्वास्थ्य सेवाएं वहांपहुंचनेकी बड़ी प्रेरणादायक कथा “ Passion to mission “मे बताइ है पूबालासाहब देवरस कहते थे “Sewa is extension of RSS shakha

    सेवा के विषये में शिक्षा ,स्वास्थ्य ,सामाजिक संस्कार और  स्वावलंबनअपेक्षित है सेवा एक भक्ति का स्वरुप है स्वास्थ्य सेवा एक आध्यात्मिकयात्रा है सेवा से संपर्क ,संग्रह ,संस्कार और संगठन होता है सेवा के द्वाराहमारी अपेक्षा है संस्कार बने ,सामाजिक परिवर्तन हो ,स्वास्थ्य  का सुधार,संस्कारीत होनेके बाद लोगों का संगठन बने और व्यक्ति निर्माण से राष्ट्रनिर्माण की प्रक्रिया हो

  सेवा करनेसे स्वावलंबन,समर्पण,आत्मविश्वास ,संयमदया ,करुणाप्रेम और विनम्रता जैसे गुण निर्माण होते हैं सेवा कार्य भी संघ कार्य हैक्योंकि यह वयंम हिंदू राष्ट्रांगभूता का द्रश्य स्वरुप है

       हमारे विचार से सेवा करनेवाले संगठनोमे  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ,राष्ट्रीय सेवा भारतीवनवासी कल्याण आश्रम ,विश्व हिंदू परिषद ,भारतविकास परिषदराष्ट्र सेविका समिति ,विद्या भारती ,दिनदयाल शोध संस्थान,आरोग्य भारतीय और सबके साथ एन एम  खड़ा है

      सेवा करने के वाले के लिए प्रशिक्षण होना चाहीए अच्छी बाते बनाना,कहानी ,प्रसंग ,बौध्धिक ,अनुभव और सेवा दर्शन -सेवा गस्ती दर्शन हो सेवाकरने में टीम बनानाअंतिम छोर तक जाना ,सबका सहभाग , विश्वसनीयताप्रमाणिकता ,प्रेम भाव ,डटे रहना , कार्य संस्कृति ,अनुशासन ,संयम,राष्ट्रीयता का भाव ,स्वदेशी पालन ,अनुशासन ,चरित्रनिर्माण  जैसी बातेंरहनी चाहिए सिर्फ कर्मकांड ना हो धन का प्रभाव भी  हो और अभाव भी  हो।प्रचार प्रसार योग्य मात्रा में हो काम करने में अहं  आये,  नीतिरितिका पालन हो और पथ्य परहेज का पालन करें शासन से ठीक अंतरबनाये रखें

     स्वास्थ्य सेवा में राष्ट्रीय विचार से चलने वाले हम है  शरीर माध्यमखलु धर्म साधनम दुख दर्द मिटाने आगे आये।कुदरती आफत होएपीडेमीकहोस्वास्थ्य यात्रा होचल चिकित्सालयमेडीकल केम्प हमे काम करना है 

   हमारा स्वास्थ्य सेवा सुसंस्कारित हो   

सेवा राष्ट्र धर्म है 

राष्ट्र धर्मतो कल्पवृक्ष हैसंघशकति ध्रुव तारा

भारत फिरसे विश्वगुरु हो यह संकल्प हमारा “

Sunday, September 18, 2022

स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर

स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर
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17 सितंबर का दिन पूरे विश्व में अंतर्राष्ट्रीय समुद्र स्वच्छता दिन के लिए मनाया जाता है 

International ocean cleaning day
हमारे शास्त्रों में बताया है 
"समुद्र वसने देवी 
पर्वत और स्तन मंडले
विष्णु पत्नी नमस्तुभयम 
पादम स्पर्सम क्षमस्वमे"
       आज पूरे विश्व पर विविध प्रकार के संकट छाए हुए हैं ।उसमें से एक बड़ा संकट है पर्यावरण के प्रदूषण का ।हम मानवीय सृष्टि अगर प्रकृति के साथ संतुलन  नहीं रखते तो आने वाले समय में प्रकृति का जो नुकसान होगा उनका जिम्मेदार स्वयम मानवी होगा ,इतना ही नहीं मानवी का अस्तित्व भी प्रकृति के अस्तित्व पर आधार रखता है ।हमारे यहां बताया जाता है व्यष्टि से समष्टि तक का संतुलन आवश्यक है ।विज्ञान के चलते ,बढ़ते उद्योगों के चलते और मनुष्य की स्वार्थी भावनाओं के चलते पर्यावरण का बड़ा नुकसान हुआ है ।उसमें से एक है समुद्र में आया हुआ प्रदूषण। 
      समुद्र का पानी आज विविध प्रकार के प्रदूषण से ग्रस्त है ।उसमें से एक बड़ा प्रदूषण है प्लास्टिक का ।विविध प्रकार के प्लास्टिक के उपयोग में लाए जाने वाली चीजें उनके उपयोग के बाद जो इधर उधर फेंकी जाती है ,वह चलती चलती समुद्र में आती है ।कहा जाता है कि प्लास्टिक का कुछ छोटा छोटा भाग हो सकता है ।लेकिन वह मिट नहीं सकता ।अंतिम भाग को हम माइक्रोप्लास्टिक कहते हैं ।यह माइक्रोप्लास्टिक का कभी नाश नहीं होता ।वह समुद्र के पानी ,समुद्र में रही बनस्पति ,जीव विविधता , मछलियां और समुद्र के पानी से बनता हुआ नमक को प्रदूषित करके न सिर्फ जैव विविधता और वनस्पतियों को नुकसान करता है लेकिन मनुष्य के शरीर मे जाकर वहाँ सभी अंगको भी नुकसान करता है ।और कैंसर जैसे अनेक महा रोग उत्पन्न करता है।
     आज के समय में यह प्लास्टिक का गार्बेज एक बड़ा पडकार है ।हम एक-एक पल पर प्लास्टिक के बिना नहीं जीते ।चाहे वह दूध , दहीं,चाय  या सब्जी लानी हो प्लास्टिक हील यूज होती है ।यह जब शहर ,गांव में इधर उधर फेंकी जाती है तो वह चलती हुई पानी के झरणोसे नदियों से चला वह से समुद्र की ओर जाती है ।भारत का समुद्र किनारा 7500 किलोमीटर लंबा है ।यह प्रदूषण इतना बढता जाता है कि कुछ समय बाद कहा जाता है कि समुद्र में मछलियों की जगह प्लास्टिक ही रहेगा।
        पूरे विश्व में 17 सितंबर को विश्व समुद्र सफाई दिन मनाया जाता है ।भारत में स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव को लेकर 5 जुलाई से 75 दिन तक यह अभियान चल रहा है ।आज के अभियान का अंतिम दिन है । हमारे लोकप्रिय प्रधानमंत्री नरेंद्र भाई मोदी का जन्मदिन भी है ,विश्वकर्मा दिन की है। 
        आज के दिन केंद्र सरकार ,राज्य सरकार, वन विभाग ,एनर्जी कमिशन ,पर्यावरण विभाग ,सीमा जन कल्याण समिति ,सागर भारती ,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर्यावरण गतिविधि और स्थानीय सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं को साथ लेकर आज समुद्र की सफाई का काम हाथमे लिया है।
         यह एक दिन का काम नहीं है ।हमारे पूरे जीवन में पर्यावरण की यानी कि आज के विषय को लेकर समुद्र की सफाई का महत्व रहना चाहिए ।हमारा जीवन तभी संभव  है जब हम पंचतत्व सृष्टि के साथ संतुलन में रहे ।हमारा सृष्टि के साथ अविभक्त संबंध है ।हम प्रकृति का दोहन करें शोषण नहीं। 
        आने वाले समय में प्लास्टिक का उपयोग कम से कम करना चाहिए ।सिंगल यूज प्लास्टिक तो बंद ही करना चाहिए ।आज रोज 50 करोड़ प्लास्टिक की थैलियां बन रही है ।कभी-कभी रास्ते में घूमते हुए गाय बगैरा पशु उनको खाकर मृत्यु के शरण होती है ।इतना ही नहीं पूरे जीव सृष्टि को उनका नुकसान हो रहा है ।सागर सफाई अभियान अंतर्गत आज हम सागर का किनारा स्वच्छ किया है ।साथ-साथ शहरों के रास्तों में भी यह सब कूड़ा कचरा प्लास्टिक को निकालने के लिए एकत्रित हुए हैं ।पूरे देश में समुद्र की सफाई आज सागर भारती संस्था के द्वारा हो रही है यह सिर्फ एक संस्था का काम न बनकर समग्र समाज का बनना चाहिए।
      समुद्र की सफाई के लिए आधुनिक मशीनें बनी हुई है सिबिन , ओशन क्रेटर,  इंटरसेप्टर ,  गारबेज पेच वि। पर लेकिन यह सब मशीनें बहुत महंगी रहती है ।और सभी जगह इनका उपयोग संभव भी नहीं है ।हमारे यहां कहा जाता है अपने हाथ जगन्नाथ ।पूरे विश्व को सुखी समृद्ध और प्रकृति के साथ जीने वाला जीवन का संदेश देने के लिए नियति ने हमें काम दिया है । यह पूर्ण करें और भारत हर विषय में विश्व गुरू हो। यह बनाने का मौका मिला है उनके लिए हम अपने आप को ठीक करें यही एक अभ्यर्थना है।







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